अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा में एक बड़ी चूक का मामला सामने आया है। वाशिंगटन डीसी के आसमान में राष्ट्रपति ट्रंप को ले जा रहा मिलिट्री हेलिकॉप्टर ‘मरीन वन’ (Marine One) और एक कमर्शियल पैसेंजर जेट बेहद करीब आ गए। हवा में विमानों के तय मानक से अधिक करीब आने (लॉस ऑफ सेपरेशन) की इस घटना से हड़कंप मच गया है। अमेरिका की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने इस गंभीर सुरक्षा घटना की जांच शुरू कर दी है।
एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) की लापरवाही: उड़ान रोकने में रहा नाकाम
सूत्रों के अनुसार, यह घटना मंगलवार दोपहर की है जब राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर मिलिट्री हेलिकॉप्टर मरीन वन ने व्हाइट हाउस के पास ‘एलिप्स’ से जॉइंट बेस एंड्रयूज के लिए उड़ान भरी थी। उसी दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) उत्तरी वर्जीनिया के रोनाल्ड रीगन नेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भर रहे एक कमर्शियल जेट को रोकने में नाकाम रहे।
यह पैसेंजर जेट ‘एनवॉय एयर’ (Envoy Air) की फ्लाइट 3742 (एम्ब्रेयर E170 जेट) थी, जो फ्लोरिडा के पेन्साकोला के लिए रवाना हुई थी। दोनों विमान नियमों में तय सीमा से अधिक करीब आ गए, हालांकि राहत की बात यह रही कि वे आपस में टकराने की सीधी स्थिति में नहीं थे और दोनों ने अपनी यात्रा सुरक्षित पूरी की।
व्हाइट हाउस का बयान: ‘राष्ट्रपति को नहीं था कोई खतरा’
घटना के बाद व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को दिए बयान में कहा कि मरीन वन की उड़ानों को दुनिया के सबसे बेहतरीन और अनुभवी पायलट संचालित करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी घटना के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप की सुरक्षा को किसी भी क्षण कोई खतरा नहीं था।
वहीं, FAA ने जारी बयान में कहा कि वह मरीन वन की सुरक्षा से जुड़ी इस दूरी संबंधी चूक (Loss of Separation) की समीक्षा कर रहा है, लेकिन प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक यह कोई टकराने जैसी सीधी खतरनाक स्थिति नहीं थी।
क्या कहते हैं नियम और क्यों बढ़ा खतरा?
रीगन नेशनल एयरपोर्ट के आसपास विमानों के बीच कम से कम 1.5 मील की क्षैतिज (Horizontal) और 500 फीट की ऊर्ध्वाधर (Vertical) दूरी बनाए रखना अनिवार्य है। मरीन वन और एनवॉय जेट के बीच यह दूरी तय मानक से कम हो गई थी।
इतना ही नहीं, इस घटना के समय एक तीसरा विमान (रिपब्लिक 4700) भी रीगन नेशनल से महज 3 मील की दूरी पर था, जिसे लैंडिंग से रोककर हवा में ही चक्कर काटने (Hold) के निर्देश दिए गए।
पिछले साल हुए भीषण हादसे के बाद भी दोहराई गई लापरवाही
यह घटना इसलिए भी अधिक चिंताजनक है क्योंकि पिछले साल जनवरी में वाशिंगटन के आसमान में ही एक कमर्शियल एयरलाइनर और सेना के ‘ब्लैक हॉक’ हेलिकॉप्टर के बीच भीषण टक्कर हो गई थी, जिसमें 67 लोगों की मौत हो गई थी। उस दर्दनाक हादसे के बाद FAA ने नियमों को सख्त कर दिया था और रीगन नेशनल एयरपोर्ट के आसपास हेलिकॉप्टर उड़ानों पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद राष्ट्रपति की उड़ान के दौरान ऐसी चूक होना अमेरिकी एविएशन सेफ्टी पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
voice of india
