
बरेली: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) की परीक्षाएं जहां लाखों छात्र-छात्राओं के लिए सुनहरे भविष्य का द्वार खोलती हैं, वहीं बरेली के भुता क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां के गंगापुर डभौरा स्थित सहोद्रा देवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य की कथित मनमानी ने कई छात्राओं का पूरा साल दांव पर लगा दिया। बुधवार को जब पूरी दुनिया हिंदी के पेपर की तैयारी में जुटी थी, तब इस स्कूल की छात्राएं परीक्षा केंद्र के बाहर अपने एडमिट कार्ड के लिए मिन्नतें करती रहीं। आरोप है कि पूरी फीस जमा होने के बावजूद उन्हें प्रवेश पत्र नहीं दिया गया, जिसके चलते वे परीक्षा से वंचित रह गईं।
फीस की पूरी वसूली, लेकिन ऐन वक्त पर दिया धोखा
छात्राओं और उनके परिजनों का आरोप बेहद गंभीर है। उनके अनुसार, सत्र की शुरुआत में ही हाईस्कूल की छात्राओं से 4500 रुपये और इंटरमीडिएट की छात्राओं से 7200 रुपये तक वसूले गए थे। इसके बावजूद प्रधानाचार्य कमलेश कुमार ने उन्हें एडमिट कार्ड जारी नहीं किए। बुधवार सुबह जब छात्राएं परीक्षा देने केंद्र पहुंचीं, तो बिना प्रवेश पत्र के उन्हें अंदर घुसने नहीं दिया गया। सालों की मेहनत और आंखों में सजे डॉक्टर-इंजीनियर बनने के सपने महज एक अधिकारी की लापरवाही और लालच की भेंट चढ़ गए।
विरोध करने पर अभद्रता और जान से मारने की धमकी
पीड़ित छात्राओं का कहना है कि जब उन्होंने अपने हक का एडमिट कार्ड मांगा, तो प्रधानाचार्य ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उनके साथ गाली-गलौज और अभद्रता की। कक्षा 12 की छात्रा प्रियंका और नैंसी के साथ-साथ हाईस्कूल की चांदनी, कुसुम, मोहिनी और खुशी ने बताया कि उन्हें धक्का देकर स्कूल से बाहर निकाल दिया गया। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें इस बारे में किसी से शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। यह घटना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि छात्राओं के मानसिक उत्पीड़न का भी मामला बनती जा रही है।
पुलिस ने आरोपी प्रधानाचार्य को लिया हिरासत में, गांव में भारी रोष
मामला तब गरमाया जब बिलखती छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ भुता थाने पहुंचीं। घटना की जानकारी मिलते ही गांव और आसपास के इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी प्रधानाचार्य कमलेश कुमार को तुरंत हिरासत में ले लिया है। प्रभारी निरीक्षक रविंद्र कुमार ने पुष्टि की है कि छात्राओं की तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और पूछताछ जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस कॉलेज में पहले भी इस तरह की अनियमितताएं सामने आती रही हैं, लेकिन शिक्षा विभाग की चुप्पी ने प्रधानाचार्य के हौसले बुलंद कर रखे थे।
शिक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए बड़े सवाल
बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन इस तरह की घटना ने निजी स्कूलों की मनमानी और शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। सवाल यह है कि अगर छात्राओं ने समय पर फीस जमा कर दी थी, तो उनका डेटा बोर्ड तक क्यों नहीं पहुंचा? क्या विभाग इन छात्राओं को परीक्षा देने का दूसरा अवसर प्रदान करेगा? फिलहाल, अभिभावकों की नजरें पुलिसिया कार्रवाई और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के अगले कदम पर टिकी हैं।
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