बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बहुप्रतीक्षित दो दिवसीय राजकीय दौरे पर चीन पहुंच चुके हैं, जहां उनका स्वागत किसी सम्राट की तरह किया गया। बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप की अगवानी की। इस दौरान भव्य सैन्य परेड और बच्चों द्वारा फूलों से किए गए स्वागत ने इस दौरे की गंभीरता और भव्यता को दुनिया के सामने रख दिया।
मार्केट खोलने के दबाव और ईरान युद्ध की छाया के बीच हो रही यह मुलाकात न केवल एशिया, बल्कि वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है।
शानदार केमिस्ट्री: ट्रंप ने जिनपिंग को बताया ‘महान दोस्त’
द्विपक्षीय वार्ता की शुरुआत में ही राष्ट्रपति ट्रंप का अंदाज काफी गर्मजोशी भरा रहा। उन्होंने शी जिनपिंग की खुलकर तारीफ करते हुए उन्हें एक “महान देश का महान नेता” और अपना “सच्चा दोस्त” करार दिया। ट्रंप ने कहा, “चीन और अमेरिका के रिश्ते अब पहले से कहीं ज्यादा बेहतर होने वाले हैं। कुछ लोग मेरी आलोचना करते हैं, लेकिन मैं खुले तौर पर कहता हूं कि राष्ट्रपति शी के साथ मेरा तालमेल शानदार है।” जवाब में शी जिनपिंग ने भी संबंधों में स्थिरता पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों के साझा हित उनके मतभेदों से कहीं बड़े हैं और दोनों की सफलता एक-दूसरे के लिए अवसर पैदा करती है।
ईरान युद्ध के कारण टला था दौरा, अब बढ़ा चीन का कद
दिलचस्प बात यह है कि यह दौरा मूल रूप से इसी साल मार्च में प्रस्तावित था, लेकिन ईरान युद्ध की वजह से इसे टालना पड़ा था। ट्रंप आखिरी बार 2017 में चीन आए थे, लेकिन 2026 का यह चीन पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली और मुखर नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार ट्रंप का सामना एक ऐसी वैश्विक शक्ति से है जो खुद को दुनिया के सबसे स्थिर नेतृत्व के रूप में पेश कर रही है। ट्रंप ने इस मुलाकात को अब तक का “सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन” बताया है।
एजेंडे में व्यापार और बाजार: क्या झुकेगा चीन?
स्वागत की औपचारिकताओं के बीच ट्रंप का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी हितों को साधना है। दौरे पर रवाना होने से पहले ही ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया था कि वह चीन से अमेरिकी उद्योगों के लिए अपने बाजार खोलने (Market Access) का पुरजोर आग्रह करेंगे। द्विपक्षीय बातचीत में व्यापार घाटे, तकनीक के हस्तांतरण और वैश्विक सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा शुरू हो गई है।
बच्चों का स्वागत और रेड कार्पेट डिप्लोमेसी
समारोह के दौरान जब दोनों नेता रेड कार्पेट पर सैन्य गार्ड का निरीक्षण कर रहे थे, तब वहां मौजूद दर्जनों बच्चों ने अमेरिकी और चीनी झंडे लहराकर उनका अभिवादन किया। इस ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ के जरिए चीन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह अमेरिका के साथ टकराव के बजाय सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहता है। हालांकि, पर्दे के पीछे की बातचीत कितनी सफल रहती है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
voice of india
