मुंबई: महाराष्ट्र में जबरन, लालच, धोखाधड़ी या शादी का झांसा देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर कड़ा प्रहार करते हुए राज्य सरकार ने नया कानून आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी प्राप्त होने के बाद ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ को राज्य के आधिकारिक राजपत्र (गजट) में अधिसूचित कर दिया गया है। इस नए कानून के प्रभावी होते ही राज्य में धर्मांतरण से जुड़ी प्रक्रियाएं और नियम बेहद सख्त हो गए हैं। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन और अंतरधार्मिक विवाह इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे।
मार्च में विधानसभा से पास, अब राष्ट्रपति की मुहर के बाद प्रभावी
महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद ने मार्च 2026 के बजट सत्र में ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित किया था। इसके बाद इसे अंतिम स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति भवन भेजा गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सहमति मिलने के बाद 30 जुलाई 2026 को राज्य सरकार ने इसे गजट में अधिसूचित कर पूरे राज्य में प्रभावी कर दिया।
इस कानून के लागू होने के साथ ही महाराष्ट्र अब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश जैसे उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए विशेष कड़े कानून लागू हैं।
स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के लिए 60 दिन पहले देनी होगी लिखित सूचना
नए कानून के तहत अगर कोई नागरिक अपनी इच्छा से कोई अन्य धर्म अपनाना चाहता है, तो उसे धर्मांतरण से कम से कम 60 दिन पूर्व संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM) को लिखित सूचना देनी होगी। धर्म परिवर्तन के पश्चात भी निर्धारित कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इस पारदर्शी व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि धर्म परिवर्तन बिना किसी दबाव, प्रलोभन या जबरदस्ती के स्वैच्छिक रूप से किया गया है।
जबरन धर्मांतरण पर सख्त सजा और परिजनों को शिकायत का अधिकार
अधिनियम में बलपूर्वक, प्रलोभन, अनुचित प्रभाव, गलत जानकारी या शादी का झांसा देकर कराए गए धर्म परिवर्तन को गैर-जमानती और दंडनीय अपराध बनाया गया है।
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सजा के प्रावधान: पहली बार अपराध सिद्ध होने पर आरोपी को 7 साल तक की जेल हो सकती है, जबकि दोबारा अपराध दोहराने पर यह सजा बढ़ाकर 10 साल तक की जाएगी।
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परिवार दर्ज करा सकेगा FIR: यदि किसी पीड़ित का जबरन धर्मांतरण कराया जाता है, तो पीड़ित के अलावा उसके माता-पिता, भाई-बहन या अन्य करीबी रिश्तेदार भी पुलिस थाने में सीधी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
सरकार का रुख: धार्मिक स्वतंत्रता पर कोई रोक नहीं
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि इस कानून का मकसद किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता को छीनना नहीं है। कानून केवल अवैध, धोखेबाज और जबरन धर्मांतरण करने वाले तंत्र पर नकेल कसने के लिए तैयार किया गया है। स्वेच्छा से धर्म बदलने वाले नागरिकों और अंतरधार्मिक विवाह (Interfaith Marriage) करने वाले जोड़ों के अधिकार इस नए कानून से पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
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