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भारत में फैटी लिवर का बढ़ता संकट: बच्चों से लेकर युवाओं तक को बना रहा शिकार, विशेषज्ञों ने दी ‘साइलेंट किलर’ की चेतावनी

नई दिल्ली: देश की राजधानी समेत पूरे भारत में फैटी लिवर (Fatty Liver) एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि अब केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि बच्चे और युवा भी इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे ‘साइलेंट किलर’ करार दिया है, क्योंकि इसके लक्षण शुरुआती दौर में स्पष्ट नहीं होते, लेकिन समय बीतने पर यह लिवर सिरोसिस और कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियों में बदल सकता है।

चिंताजनक आंकड़े: हर तीसरा भारतीय चपेट में

विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और विशेषज्ञों द्वारा जारी किए गए आंकड़े भारत की सेहत को लेकर डरावनी तस्वीर पेश कर रहे हैं:

    • राष्ट्रीय औसत: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, भारत की लगभग 38 से 40 प्रतिशत वयस्क आबादी फैटी लिवर से ग्रसित है। यानी देश का हर तीसरा नागरिक इस बीमारी का शिकार है।

    • बच्चों पर खतरा: आंकड़ों के मुताबिक, देश के 30 से 35 प्रतिशत बच्चे फैटी लिवर के जोखिम में हैं। वहीं, मोटापे (Obesity) का शिकार बच्चों में यह प्रतिशत 60% से भी अधिक है।

    • दिल्ली की गंभीर स्थिति: इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायिलियरी साइंसेज (ILBS) ने दिल्ली के 11 जिलों में 6,000 लोगों पर अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि 18 वर्ष से अधिक आयु के 50 से 56 प्रतिशत वयस्कों में फैटी लिवर के लक्षण मौजूद हैं।

Stages of liver damage, liver disease. Healthy, fatty, liver fibrosis and cirrhosis isolated on white background.Round diagram.Vector illustration

क्यों बढ़ रहा है यह ‘साइलेंट किलर’?

विशेषज्ञों ने इस बीमारी के बढ़ने के पीछे तीन मुख्य कारणों को चिन्हित किया है:

  1. खराब खानपान: जंक फूड, अत्यधिक चीनी, और प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट का सेवन लिवर में चर्बी जमा होने का मुख्य कारण बन रहा है।

  2. बढ़ता स्क्रीन टाइम: बच्चों और युवाओं में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के बढ़ते इस्तेमाल ने उन्हें एक जगह बैठने पर मजबूर कर दिया है।

  3. शारीरिक निष्क्रियता: व्यायाम की कमी और सुस्त जीवनशैली (Sedentary Lifestyle) ने शरीर की मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया को सुस्त कर दिया है।

विशेषज्ञों की सलाह: जीवनशैली में बदलाव ही एकमात्र बचाव

डॉक्टरों का मानना है कि यदि समय रहते अपनी आदतों में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में लिवर ट्रांसप्लांट के मामलों में भारी उछाल आ सकता है।

बचाव के उपाय क्या करें?
आहार फाइबर युक्त भोजन लें, चीनी और तैलीय पदार्थों से बचें।
व्यायाम प्रतिदिन कम से कम 30-45 मिनट पैदल चलें या योग करें।
वजन नियंत्रण मोटापे को कम करना फैटी लिवर के इलाज का सबसे प्रभावी तरीका है।
जांच नियमित अंतराल पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और अल्ट्रासाउंड कराएं।

 

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