कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए प्रचंड तूफान ने न केवल सत्ता के गलियारों को हिला दिया है, बल्कि प्रशासन के रुख को भी पूरी तरह बदल दिया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक जीत के बाद राज्य की मशीनरी ने ‘हवा के रुख’ को भांपते हुए अपनी वफादारियां बदलनी शुरू कर दी हैं। इसका सबसे बड़ा और चौंकाने वाला उदाहरण कोलकाता पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर देखने को मिला है।
सत्ता जाते ही पुलिस हुई ‘बेवफा’, अनफॉलो हुए दीदी और अभिषेक
कभी ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के निर्देशों पर मुस्तैदी से काम करने वाली कोलकाता पुलिस ने नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले ही उनसे दूरी बना ली है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोलकाता पुलिस ने निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को अपनी ‘फॉलोइंग’ लिस्ट से हटा दिया है। यह बदलाव मतगणना के तुरंत बाद देखा गया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

खाकी की लिस्ट में अब पीएम मोदी और सुवेंदु अधिकारी का जलवा
सोशल मीडिया यूजर्स उस वक्त हैरान रह गए जब उन्होंने देखा कि ममता बनर्जी को अनफॉलो करने के बाद कोलकाता पुलिस की फॉलो लिस्ट में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बंगाल बीजेपी के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी के नाम शामिल हो गए हैं। लोग इस बदलाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि सत्ता हाथ से जाते ही वफादारों ने भी पाला बदलने में देर नहीं लगाई।
भवानीपुर में भी सुवेंदु ने दी मात, 15 साल के टीएमसी शासन का अंत
2026 के इस चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने इतिहास रचते हुए ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर में ही पटखनी दे दी। सुवेंदु ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। विशेष रूप से भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक मतों के अंतर से शिकस्त दी। इस हार के साथ ही बंगाल में टीएमसी के 15 साल पुराने किले को ढहाते हुए बीजेपी ने 207 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया है, जबकि टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई है।
बंगाल में फिर गूंजा ‘पोरीबोरतोन’, वामपंथ और दीदी के बाद अब नया दौर
पश्चिम बंगाल में 34 साल के वामपंथी शासन और 15 साल के टीएमसी राज के बाद एक बार फिर ‘पोरीबोरतोन’ यानी बदलाव की गूंज सुनाई दे रही है। पुलिस और प्रशासन का यह बदला हुआ व्यवहार इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राज्य में शक्ति का केंद्र पूरी तरह बदल चुका है। नई सरकार के गठन से पहले प्रशासनिक हलकों में मची यह खलबली चर्चा का विषय बनी हुई है।
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