हैदराबाद। नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन-जी (Gen-Z) युवाओं के हालिया विरोध प्रदर्शन के बाद अब देश भर में युवा वर्ग की नीति निर्माण में भागीदारी को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब इस पीढ़ी को देश निर्माण में सीधे शामिल करने की वकालत शुरू हो गई है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने देश के राजनीतिक परिदृश्य को बदलने वाला एक बड़ा प्रस्ताव सामने रखा है।
तेलंगाना सरकार का मानना है कि देश में चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु सीमा घटाई जानी चाहिए ताकि युवा संसद और विधानसभाओं में अपनी आवाज मजबूती से उठा सकें। यदि यह विचार कानून का रूप लेता है, तो वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में जेन-जी के लाखों युवा प्रत्याशी बनने के योग्य हो जाएंगे।
अगस्त में बुलाया जाएगा विशेष सत्र, केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने आधिकारिक ऐलान किया है कि अगस्त में राज्य विधानसभा और विधान परिषद का एक संयुक्त विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस विशेष सत्र में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से निम्नलिखित सिफारिशें की जाएंगी:
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लोकसभा और विधानसभा चुनाव: चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु सीमा को 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष किया जाए।
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राज्यसभा और विधान परिषद: न्यूनतम आयु सीमा को 30 वर्ष से घटाकर 25 वर्ष किया जाए।
राज्य विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, ताकि संसद के माध्यम से आवश्यक संवैधानिक संशोधन किए जा सकें। सीएम रेवंत रेड्डी का कहना है कि जंतर-मंतर के आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि युवा अब सिर्फ दर्शक या प्रदर्शनकारी नहीं बने रहना चाहते, बल्कि देश की नीतियों को दिशा देने में अपनी सीधी भूमिका चाहते हैं।
जब 21 की उम्र में IAS बन सकते हैं, तो MP या MLA क्यों नहीं?
अपनी इस मांग को ऐतिहासिक संदर्भों से जोड़ते हुए रेवंत रेड्डी ने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1988 में 61वें संविधान संशोधन के जरिए मतदान करने की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की थी। इसके बाद पी. वी. नरसिम्हा राव सरकार के दौर में स्थानीय निकाय (पंचायती राज व निकाय) चुनावों में लड़ने की उम्र 21 साल की गई थी।
उन्होंने तर्क दिया कि जब 21-22 वर्ष की आयु में युवा कठिन परीक्षाएं पास करके आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) अफसर बन सकते हैं, नए स्टार्टअप और अरबों की यूनिकॉर्न कंपनियां चला सकते हैं, तो उन्हें संसद या विधानसभा का सदस्य बनने का अवसर क्यों नहीं मिलना चाहिए?
30 फीसदी आबादी, लेकिन प्रतिनिधित्व 1 फीसदी से भी कम
सामान्य तौर पर 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं को ‘जेन-जी’ (Gen-Z) श्रेणी में रखा जाता है। यही वर्ग इस समय कॉलेजों, नौकरियों और डिजिटल क्रांति का मुख्य आधार है। आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल आबादी में लगभग 30 फीसदी हिस्सेदारी जेन-जी की है, लेकिन 543 सीटों वाली लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व 1 प्रतिशत से भी कम है।
तेलंगाना सरकार का मानना है कि युवाओं के पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने के कारण उनके मुख्य मुद्दे कानूनविदों तक सही ढंग से नहीं पहुंच पाते। हालांकि इस बदलाव के लिए केंद्र सरकार को कई कानूनी और संवैधानिक संशोधन करने होंगे, लेकिन तेलंगाना सरकार की इस पहल ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
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