Thursday , 28 May 2026

Tamil Nadu Election 2026: तमिलनाडु में सियासी बिसात बिछी, DMK गठबंधन में मची रार तो NDA में….

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 का बिगुल बजते ही राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है। सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए राज्य के दो दिग्गज गठबंधनों—AIADMK के नेतृत्व वाले NDA और DMK के नेतृत्व वाले ‘सेक्यूलर प्रोग्रेसिव अलायंस’ (SPA) के बीच शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। जहां एक ओर एनडीए खेमे में सीटों का गणित लगभग सुलझता दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर स्टालिन के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन में सहयोगियों की नाराजगी ने टेंशन बढ़ा दी है।

NDA का ‘मिशन 170+’: अमित शाह से मुलाकात के बाद बदली रणनीति

एनडीए गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला अब अंतिम चरण में है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य दल AIADMK करीब 170 सीटों पर ताल ठोकने की तैयारी में है। वहीं, भाजपा के खाते में 25 से 29 सीटें आ सकती हैं। गठबंधन के अन्य साथियों में पीएमके (PMK) को 18 और एएमएमके (AMMK) को 10 सीटें मिलने की प्रबल संभावना है। हाल ही में एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरण ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने विपक्षी खेमे पर तंज कसते हुए अपने गठबंधन की तुलना ‘महाभारत के पांडवों’ से कर दी है। माना जा रहा है कि अगले 48 घंटों में चेन्नई की बैठक के बाद सीटों का औपचारिक ऐलान हो जाएगा।

DMK गठबंधन में बगावत: टीवीके ने छोड़ा साथ, वामपंथी भी अड़े

दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के लिए अपने कुनबे को एकजुट रखना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। सीटों के कम आवंटन से नाराज होकर टीवीके (TVK) ने गठबंधन से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया है। टीवीके दो सीटों की मांग पर अड़ी थी, जबकि डीएमके केवल एक सीट देने को तैयार थी। इसके अलावा, वामपंथी दल सीपीएम (CPM) भी सीटों की संख्या को लेकर आंखें दिखा रहा है। पार्टी के भीतर इस बात पर मंथन चल रहा है कि क्या डीएमके की शर्तों को माना जाए या अकेले चुनाव मैदान में उतरा जाए।

कांग्रेस और अन्य सहयोगियों का क्या है हाल?

डीएमके ने अब तक अपने सहयोगियों को कुल 43 सीटें आवंटित की हैं। इसमें कांग्रेस को 28, सीपीआई को 5 और एमडीएमके को 4 सीटें दी गई हैं। वीसीके (VCK) के साथ अभी भी रस्साकशी जारी है। चर्चा है कि वीसीके अपनी पुरानी मांग छोड़कर 7 या 8 सीटों पर समझौता कर सकती है। छोटे दलों की इस नाराजगी ने डीएमके की चुनावी राह में कांटे बिछा दिए हैं, जिसका सीधा फायदा एनडीए उठाने की फिराक में है।

शक्ति संतुलन और भविष्य की राह

तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से गठबंधनों के जोड़-तोड़ पर टिकी रही है। इस बार एनडीए जहां ‘एकजुटता’ का संदेश देकर वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रहा है, वहीं डीएमके अपने ‘सेक्यूलर’ टैग के साथ सहयोगियों को साधने में जुटी है। आने वाले कुछ दिन तमिलनाडु की राजनीति की दिशा और दशा तय करेंगे। क्या स्टालिन अपनी टीम को बिखरने से बचा पाएंगे या ‘पांडव’ की रणनीति काम कर जाएगी, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

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