नई दिल्ली। भगवान शिव की आराधना और भक्ति का पावन महीना ‘सावन’ शुरू होने में अब बहुत कम समय बचा है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 30 जुलाई 2026 से सावन के पवित्र महीने का शुभारंभ होने जा रहा है, जिसका समापन सावन माह की पूर्णिमा तिथि के साथ होगा। पूरे सावन मास में देश भर के प्रमुख शिव मंदिरों में भोलनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ता है। कांवड़िये दूर-दूर से पवित्र नदियों का जल लाकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। लेकिन सनातन धर्म में पूजा-पाठ के दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘दीप प्रज्वलन’ है, क्योंकि बिना दीपक जलाए कोई भी धार्मिक अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाता। स्कंद पुराण के अनुसार, सावन में शिवलिंग के सामने अलग-अलग तेलों का दीपक जलाने से विशेष और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
स्कंद पुराण के अनुसार: सावन में शिवलिंग के सामने जलाएं इन चीजों का दीपक
1. कुसुम के तेल का दीपक
स्कंद पुराण के अनुसार, सावन के महीने में यदि आप रोजाना शिवलिंग के समक्ष कुसुम के तेल का दीपक प्रज्वलित करते हैं, तो इससे महादेव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। कुसुम के तेल से दीपक जलाने पर व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता दूर होती है और सुख, समृद्धि व वैभव में वृद्धि होती है।
2. अलसी के तेल का दीपक
धार्मिक शास्त्रों में अलसी के तेल से बने दीपक को भी कुसुम के तेल के समान ही पुण्यदायी और फलदायी माना गया है। सावन के पूरे महीने में सुबह या शाम के समय शिवलिंग के सामने अलसी के तेल का दीपक जलाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
3. तिल के तेल का दीपक
तिल का तेल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में बेहद पवित्र माना गया है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सावन में शिवलिंग के पास तिल के तेल का दीपक जलाने से व्यक्ति को आध्यात्मिक ज्ञान और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इसके प्रभाव से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और खुशहाली आती है।
4. देशी घी का दीपक (सर्वश्रेष्ठ)
शास्त्रों में गाय के शुद्ध देशी घी के दीपक को सभी दीपों में सबसे उत्तम और श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। घी का दीपक भगवान शिव को अति प्रिय है। सावन के महीने में रोजाना सुबह और शाम भगवान भोलेनाथ की आरती घी के दीपक से ही करनी चाहिए। इससे घर का वातावरण शुद्ध होता है और संकट दूर होते हैं।
कपूर, अगरु और धूप का भी है विशेष महत्व
स्कंद पुराण में दीपक के अलावा सावन पूजन के दौरान कपूर, अगरु और सुगंधित धूप के प्रयोग का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि सावन में महादेव की पूजा करते समय कपूर और अगरु की सुगंध से वातावरण पवित्र होता है, जिससे शिव शंभू अपने भक्तों की पुकार जल्दी सुनते हैं और आरोग्य का वरदान देते हैं।
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