Wednesday , 29 April 2026

राजा रघुवंशी हत्याकांड: 320 दिन बाद मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत, गिरफ्तारी में ‘कानूनी चूक’ बनी रिहाई का आधार

इंदौर/शिलांग: मध्य प्रदेश के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को करीब 320 दिनों तक जेल में रहने के बाद जमानत मिल गई है। मेघालय की राजधानी शिलांग की एक अदालत ने सोमवार को उनकी रिहाई के आदेश जारी किए थे, जिसके बाद मंगलवार शाम को वे जेल से बाहर आ गईं। हालांकि, कोर्ट ने उन पर सख्त शर्तें लागू की हैं।

गिरफ्तारी की प्रक्रिया में ‘बड़ी चूक’ बनी जमानत का आधार

अदालत ने सोनम को राहत देने के पीछे सबसे बड़ा कारण गिरफ्तारी के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया में खामियों को माना। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि 7 जून 2025 को गाजीपुर में गिरफ्तारी के समय सोनम को उन पर लगे आरोपों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।

अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) का हवाला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया:

“किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार किए जाने के कारणों की जानकारी तुरंत देना अनिवार्य है। ऐसा न करना मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।”

अदालत ने पाया कि जांच दस्तावेजों में गंभीर त्रुटियां थीं और गिरफ्तारी कानून के अनुरूप नहीं की गई थी।

शर्तों के साथ रिहाई: शिलांग में ही रहना होगा

भले ही सोनम को जेल से रिहा कर दिया गया है, लेकिन वे पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं। अदालत ने जमानत के साथ कुछ कड़ी शर्तें लगाई हैं:

  • शहर छोड़ने पर पाबंदी: सोनम ट्रायल के दौरान शिलांग नहीं छोड़ सकतीं।

  • अनिवार्य उपस्थिति: ट्रायल की प्रत्येक सुनवाई के दौरान उन्हें अदालत में उपस्थित रहना होगा।

  • अनुमति अनिवार्य: बिना कोर्ट की पूर्व अनुमति के वे मेघालय की सीमा से बाहर नहीं जा सकेंगी।

क्या था मामला?

यह मामला साल 2025 में तब सुर्खियों में आया था जब इंदौर के रहने वाले राजा रघुवंशी की उनके हनीमून के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात में उनकी पत्नी सोनम को ही मुख्य आरोपी बनाया गया था। मंगलवार शाम जब सोनम के पिता देवी सिंह शिलांग पहुंचे और औपचारिकताएं पूरी कीं, तब वे जेल से बाहर आईं। रिहाई के बाद उन्होंने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।

इस फैसले के बाद अब सबकी नजरें आगामी ट्रायल पर टिकी हैं, जहां पुलिस को नए सिरे से सबूत पेश करने होंगे।

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