उत्तर प्रदेश का नवनिर्मित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे इन दिनों अपनी खराब निर्माण गुणवत्ता और सियासी बयानों के चलते सुर्खियों में छाया हुआ है। उद्घाटन के महज 20 दिन के भीतर पांच बार सड़क धंसने और उसकी बार-बार मरम्मत होने की तस्वीरों के बीच अब एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें मरम्मत के बाद पंखों (ब्लोअर) से सड़क को सुखाया जा रहा है। इस वीडियो को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
अखिलेश यादव का तंज: पंखों से सड़क सुखाने की नौबत, उठाया बड़ा जोखिम
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वीडियो साझा करते हुए तंज कसा कि यह भाजपाई तरक्की की नई हवा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस हाइवे का उद्घाटन कुछ दिन पहले ही हुआ हो, उसे इतनी जल्दी बार-बार मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ रही है। मरम्मत वाले हिस्से को जल्दी सुखाने के लिए पंखों के इस्तेमाल को उन्होंने हास्यास्पद स्थिति करार दिया। अखिलेश यादव ने कहा कि जब एक्सप्रेसवे महज दो-तीन सप्ताह के भीतर ही जवाब दे रहा है, तो उस पर तेज रफ्तार से सफर करने का जोखिम कौन उठाएगा। इसके साथ ही उन्होंने ‘अटल प्रोग्रेस-वे’ योजना का जिक्र करते हुए सरकार पर निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।
13 जुलाई को हुआ था उद्घाटन, 4200 करोड़ की लागत
63 किलोमीटर लंबे इस बहुचर्चित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन इसी साल 13 जुलाई को किया गया था। इस मेगा प्रोजेक्ट के निर्माण पर लगभग 4,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है। उद्घाटन के बाद एक तरफ के सफर के लिए 275 रुपये टोल टैक्स तय किया गया था। हालांकि, उद्घाटन के चंद दिनों बाद ही सड़क के धंसने और सतह खिसकने की शिकायतें मिलने लगीं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, केवल 20 दिनों के अंतराल में पांच अलग-अलग जगहों पर सड़क धंस चुकी है।
टोल प्लाजा के आगे रास्ता डायवर्ट, NHAI ने रोकी टोल वसूली
सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि टोल प्लाजा पार करने के बाद उन्हें आगे जाकर मजबूरन यू-टर्न लेना पड़ रहा है और कई किलोमीटर तक वाहनों को रॉन्ग साइड (विपरीत दिशा वाली लेन) से निकाला जा रहा है। कई लोगों ने शिकायत की कि टोल पर उन्हें पहले से इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई थी कि आगे रास्ता खराब है। बढ़ते विरोध और फजीहत को देखते हुए अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मरम्मत कार्य पूरा होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली पूरी तरह से बंद करने का बड़ा फैसला लिया है। इस दौरान टोल राजस्व में होने वाले घाटे की भरपाई निर्माण कंपनी से ही की जाएगी।
NHAI की बड़ी कार्रवाई: कंपनी नॉन-परफॉर्मर घोषित, अफसर सस्पेंड
मामले की गंभीरता को देखते हुए NHAI ने निर्माण एजेंसी ‘PNC इंफोटेक’ के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। प्राधिकरण ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को पत्र लिखकर इस कंपनी को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने की संस्तुति भेज दी है। इसके अलावा, परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को उनके पद से हटा दिया गया है, जबकि पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को आधिकारिक तौर पर चार्जशीट जारी की गई है। लापरवाही बरतने के आरोप में प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता, रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार और स्वतंत्र अभियंता टीम के प्रमुख सुरेंद्र कुमार को अगले दो साल तक NHAI और मंत्रालय की किसी भी परियोजना में काम करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सड़क क्यों धंसी? IIT खड़गपुर की टीम करेगी तकनीकी जांच
NHAI के अधिकारियों का तर्क है कि लगातार हुई बारिश का पानी रिसकर एक्सप्रेसवे के नीचे की मिट्टी की परतों तक पहुंच गया, जिससे मिट्टी की बेयरिंग कैपेसिटी और मजबूती प्रभावित हुई और किलोमीटर-64 के पास सड़क धंसने (स्लिपेज) की स्थिति बन गई। हालांकि, इसके असली और तकनीकी कारणों का पता लगाने के लिए IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही, लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक के जरिए पूरे एक्सप्रेसवे की पेवमेंट स्थिति का परीक्षण कराया जा रहा है। एनएचएआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरम्मत कार्य पर आने वाले करीब 3 करोड़ रुपये के खर्च का भुगतान निर्माण एजेंसी को खुद अपनी जेब से करना होगा।
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