कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पुलिस जब एक साधारण से दिखने वाले दो मंजिला मकान में छापेमारी करने पहुंची, तो अंदर का नजारा देख अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। कमरे का दृश्य किसी क्राइम-थ्रिलर बॉलीवुड फिल्म जैसा था, जहां हर तरफ नोटों से भरी बोरियां और बेतहाशा सोना बिखरा पड़ा था। यह ठिकाना किसी बड़े उद्योगपति का नहीं, बल्कि सरकारी बस के एक पूर्व ड्राइवर मीनार मंडल का है, जो अब रेत और पत्थर माफिया बन चुका है।
पुलिस ने मौके से 20 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी नकदी और लगभग 15 किलो शुद्ध सोना जब्त किया है। बरामद किए गए सोने में 1-1 किलो की 14 छड़ें और 100-100 ग्राम के 10 बिस्कुट शामिल हैं, जिसकी बाजार में मौजूदा कीमत करीब 21.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।
नोट गिनते-गिनते हांफने लगीं 5 मशीनें, बक्सों में भरकर ले जाया गया खजाना
बरामद रकम इतनी भारी-भरकम थी कि हाथों से गिनती करना नामुमकिन था। पुलिस प्रशासन ने तुरंत नोट गिनने वाली 5 मशीनें मंगवाईं। हालांकि, काली कमाई का अंबार इतना बड़ा था कि लगातार चलने के कारण नोट गिनने की मशीनें भी बीच में गर्म होकर बंद होने लगीं। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद पूरी नकदी की गिनती संपन्न हो सकी।
इस अकूत संपत्ति, नकदी और सोने को सुरक्षामुक्त तरीके से जब्त कर ले जाने के लिए पुलिस को लोहे के 5 बड़े ट्रंक (बक्से) मंगवाने पड़े। पुलिस ने छापेमारी के दौरान ही आरोपी मीनार मंडल उर्फ टुल्लू मंडल और उसके बेटे को हिरासत में ले लिया है।
बस ड्राइवर से ‘धन कुबेर’ बनने का सफर
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी मीनार मंडल पहले ‘नॉर्थ बंगाल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन’ में बतौर बस चालक काम करता था। कुछ साल पहले नौकरी छोड़कर वह अपने रिश्तेदार के पत्थर खनन कारोबार में उतर गया।
देखते ही देखते उसने अवैध खनन और राजस्व चोरी के जरिए करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। बीरभूम के देवचा गांव स्थित उसके घर पर हुई इस कार्रवाई को क्षेत्र में अवैध पत्थर खनन व बालू माफियाओं के खिलाफ जारी अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
मवेशी तस्करी से लेकर मर्डर केस तक में रहा है नाम
मीनार मंडल उर्फ टुल्लू का नाम केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं है। सीबीआई की जांच में करोड़ों रुपये के चर्चित मवेशी तस्करी मामले में भी उसका नाम प्रमुखता से सामने आया था। अगस्त 2022 में सीबीआई ने उसके कई ठिकानों और गोदामों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद नवंबर 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उसे दिल्ली तलब किया था।
ईडी का समन मिलते ही अक्टूबर 2022 के एक पुराने हत्या के मामले में बीरभूम पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। जमानत मिलने के बाद से वह लगातार पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहा था। उसे बीरभूम तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल का भी नजदीकी माना जाता रहा है।
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