
वडोदरा ब्यूरो: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि 21वीं सदी के भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना वक्त की सबसे बड़ी मांग है। वडोदरा में आयोजित ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि एआई की जरूरत सिर्फ आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेती, स्वास्थ्य, विनिर्माण और रोबोटिक्स के क्षेत्र में क्रांति ला सकती है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार देश के युवाओं को एआई-सक्षम बनाने के लिए एक बड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने जा रही है।
डिग्री से ज्यादा हुनर की कीमत, छात्रों को मिलेगी देश के टॉप शिक्षकों से मुफ्त कोचिंग
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए हमारी शिक्षा प्रणाली में भी डिग्री से ज्यादा स्किल (कौशल) को तरजीह दी जा रही है। उन्होंने कहा कि देश के नौजवान नई तकनीक को सीखकर खेती के लिए एआई टूल बना सकते हैं, स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार कर सकते हैं और रोबोटिक्स में नए स्टार्टअप्स खड़े कर सकते हैं। मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए सरकार देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के जरिए छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने के रोडमैप पर भी आगे बढ़ रही है।
2800 किमी का फ्रेट कॉरिडोर पूरा, विपक्ष पर चुटकी— ‘पुरानी फाइलों को नहीं मिला कोई कॉरिडोर’ संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कनेक्टिविटी के बुनियादी ढांचे पर जोर देते हुए बताया कि वडोदरा में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) की आखिरी कड़ियां जुड़ चुकी हैं और देश में 2,800 किलोमीटर से अधिक लंबे मालवहन नेटवर्क का काम पूरा हो चुका है। पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि 2004 में फ्रेट कॉरिडोर का विचार आया था, लेकिन 2014 तक फाइलें सिर्फ दफ्तरों के चक्कर काटती रहीं। इन फाइलों को खुद आगे बढ़ने के लिए कोई कॉरिडोर नहीं मिला। 2014 के बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने रफ्तार पकड़ी और आज इस रूट पर रोजाना 430 से ज्यादा मालगाड़ियां दौड़ रही हैं। पहले 100 किमी की दूरी तय करने में मालगाड़ी को साढ़े छह घंटे लगते थे, अब समय आधे से भी कम हो गया है। ट्रकों से जहां 30 घंटे लगते थे, अब 10-12 घंटे में माल पहुंच रहा है। जेएनपीटी से वडोदरा तक चली डबल-स्टैक ट्रेन का जिक्र करते हुए उन्होंने कटाक्ष किया कि “नाराज फूफा जी” पूछते थे कि ट्रक वालों का क्या होगा, लेकिन आज उन्हें भी काम मिल चुका है।
पौने तीन लाख करोड़ का रेल बजट, 10 साल में बने 50 हजार आधुनिक कोच रेलवे के कायाकल्प का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष रेलवे का बजट पौने तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जो 12 साल पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। 2014 के बाद देश में 50 हजार अत्याधुनिक रेल कोच बनाए गए हैं। पिछली सरकार पर तीखा वार करते हुए पीएम ने कहा कि जो 10 साल में 50 हजार टॉयलेट नहीं बना पाए थे, उनके मुकाबले आज भारतीय रेल में क्रांतिकारी बदलाव दिख रहे हैं और उन दुर्गम आदिवासी अंचलों तक भी ट्रेनें पहुंच रही हैं, जो दशकों से कटे हुए थे।
‘चिप्स से शिप्स’ तक आत्मनिर्भरता, पीएम सूर्य घर योजना से 55 लाख घर रोशन पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज ‘चिप्स से शिप्स’ तक मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम देश में ही तैयार कर रहा है। फोटोवोल्टिक मॉड्यूल उत्पादन में भारत 200 गीगावाट से अधिक क्षमता हासिल कर चुका है, जिससे ‘पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना’ को नई ताकत मिली है। देश के 55 लाख परिवार अपनी छतों पर सोलर पैनल लगा चुके हैं, जिनमें अकेले 11 लाख गुजरात से हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि सेमीकंडक्टर चिप, डेटा सेंटर और एआई इंडस्ट्री के लिए बिजली ही जीवनरेखा है। इसके लिए सरकार सौर, पवन, हाइड्रो और परमाणु ऊर्जा पर रिकॉर्ड गति से काम कर रही है तथा यूरेनियम व क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति के लिए वैश्विक समझौते किए जा रहे हैं।
वडोदरा में गूंज रही ‘मेड इन इंडिया’ C-295 विमान की गड़गड़ाहट विपक्ष के बयानों पर पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चौराहे पर झूठ की गूंज से भरमाने वाले बहुत मिल जाएंगे, लेकिन देश का नौजवान सच्चाई की हुंकार के साथ कदमताल कर रहा है। उन्होंने वडोदरा की ऐतिहासिक ज्ञान और औद्योगिक परंपरा की प्रशंसा की। पीएम ने गर्व से कहा कि वडोदरा अब देश के पहले ‘मेड इन इंडिया’ सी-295 (C-295) सैन्य परिवहन विमान के निर्माण का वैश्विक केंद्र बन चुका है और इसकी पहली सफल उड़ान वडोदरा के आसमान में नया इतिहास रच चुकी है।
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