Thursday , 30 April 2026

दिवालिया होने की कगार पर पाकिस्तान: ईरान-अमेरिका जंग ने शहबाज शरीफ के उड़ाए होश, बोले- ‘अब नहीं संभल रही. …

इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के पदचाप ने पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को पाताल में धकेल दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद स्वीकार किया है कि इस क्षेत्रीय अस्थिरता ने देश की आर्थिक हालत पतली कर दी है। इस्लामाबाद में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान शहबाज शरीफ ने देश को चेतावनी देते हुए कहा कि जो तेल आयात पहले 300 मिलियन डॉलर था, वह अब उछलकर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इस 500 मिलियन डॉलर के अतिरिक्त बोझ ने पाकिस्तान के खजाने को खाली कर दिया है।

मध्यस्थता की कोशिशें फेल, शहबाज बोले- ‘अकेले हमारे बस की बात नहीं’

ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच पाकिस्तान दुनिया के सामने शांतिदूत बनने का ढोंग कर रहा था, लेकिन शहबाज शरीफ के ताजा बयान ने इसकी असल वजह खोल दी है। दरअसल, पाकिस्तान इस युद्ध में मध्यस्थता के लिए इसलिए बेचैन था क्योंकि उसकी अपनी अर्थव्यवस्था जल रही है। हालांकि, न तो अमेरिका और न ही ईरान बातचीत के लिए तैयार हैं। शहबाज ने दबी जुबान में यह मान लिया है कि तनाव कम करना पाकिस्तान के अकेले के बस की बात नहीं है और अब वह अन्य देशों से मदद की गुहार लगा रहा है।

कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर, पेट्रोलियम मंत्री की ‘थपथपाई’ पीठ

कैबिनेट बैठक में शहबाज शरीफ ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें फिर से बेकाबू हो रही हैं, जिससे देश में नए दाम तय करना मजबूरी बन गया है। दिलचस्प बात यह रही कि जहां जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, वहीं पीएम ने अपने पेट्रोलियम मंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से अभी पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें नहीं दिख रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कबूला कि युद्ध के कारण आया 500 मिलियन डॉलर का उछाल पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ की हड्डी तोड़ रहा है।

देश में लॉकडाउन जैसे हालात, बचा है सिर्फ 5 दिन का तेल!

पाकिस्तान में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि वहां ‘ऑयल लॉकडाउन’ जैसे हालात बन रहे हैं। ऊर्जा और वित्त मंत्रालय की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के पास अब मुश्किल से 5 से 7 दिनों का कच्चा तेल बचा है। सरकार ने खपत कम करने के लिए वर्क फ्रॉम होम (WFH) लागू कर दिया है। पैसे बचाने की जद्दोजहद ऐसी है कि सरकारी अफसरों और मंत्रियों के वेतन तक में कटौती की गई है। आलम यह है कि देश अंधेरे और पहिये थमने की कगार पर खड़ा है।

UAE की नाराजगी और सऊदी का कर्ज: कर्ज चुकाने के लिए भी ले रहे उधार

अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी पाकिस्तान की ‘बैलेंसिंग एक्ट’ नीति फेल हो गई है। ईरान के हमलों पर चुप्पी साधने से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस कदर भड़क गया है कि उसने पाकिस्तान को दी गई आर्थिक मदद वापस मांग ली है। अब पाकिस्तान की हालत ‘कंगाल’ जैसी हो गई है; वह यूएई का कर्ज चुकाने के लिए सऊदी अरब जैसे देशों के सामने झोली फैलाकर नया कर्ज मांग रहा है। कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान की जंग ने पाकिस्तान को बर्बादी के उस मुहाने पर खड़ा कर दिया है जहां से वापसी मुमकिन नहीं दिख रही।

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