NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले ने अब एक भीषण संगठित अपराध का रूप ले लिया है। जैसे-जैसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और राज्य पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है, इस ‘करोड़ों के खेल’ के ऐसे काले सच सामने आ रहे हैं जिन्होंने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की साख को हिला दिया है। राजस्थान और हरियाणा के बाद अब इस घोटाले का केंद्र महाराष्ट्र बनता जा रहा है, जहां से एक और बड़ी गिरफ्तारी हुई है।
₹30 लाख तक में सौदा: ‘गेस पेपर’ के नाम पर बेची गई छात्रों की किस्मत
जांच एजेंसियों के हाथ लगे सबूतों के मुताबिक, जयपुर और हरियाणा के सिंडिकेट ने इस पेपर को अलग-अलग कीमतों पर बेचा। जहां कुछ छात्रों से 10 से 15 लाख रुपये लिए गए, वहीं कुछ संपन्न अभ्यर्थियों से एक पेपर के बदले 25 से 30 लाख रुपये तक वसूले गए। गिरोह ने इस पूरी साजिश को ‘गेस पेपर’ का नाम दिया था। इस तथाकथित गेस पेपर में 400 सवाल थे, लेकिन उनके बीच बड़ी ही चालाकी से असली पेपर के बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 45 सवाल छिपा दिए गए थे।
महाराष्ट्र कनेक्शन: पुणे से भागकर अहिल्यानगर पहुंचा आरोपी गिरफ्तार
पेपर लीक की जांच का दायरा अब महाराष्ट्र में तेजी से फैल रहा है। नासिक, पुणे और लातूर के बाद अब अहिल्यानगर से पुलिस ने धनंजय लोखंडे नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
-
पुणे से फरार: जांच में पता चला कि धनंजय की आखिरी लोकेशन पुणे में थी, लेकिन पुलिस की रेड की भनक लगते ही वह भागकर अहिल्यानगर पहुंच गया।
-
जाल बिछाकर पकड़ा: विशेष जांच टीम ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में लिया। महाराष्ट्र में इस मामले में यह दूसरी बड़ी गिरफ्तारी है। पुलिस को उम्मीद है कि धनंजय से पूछताछ में पुणे और लातूर के बड़े ‘एजेंटों’ के नाम सामने आएंगे।
ऐसे खुला ‘सफेदपोश’ माफिया का राज
इस महाघोटाले का भंडाफोड़ सीकर (राजस्थान) के एक पीजी संचालक की सतर्कता से हुआ। उसे गिरोह द्वारा बांटे जा रहे ‘गेस पेपर’ पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसने शिक्षकों से इसकी जांच कराई। जब 3 मई को परीक्षा हुई और सवाल हुबहू मैच कर गए, तब NTA और जांच एजेंसियों को अलर्ट किया गया। जांच में पुष्टि हुई कि 2 मई की रात को ही प्रश्नपत्र PDF फॉर्मेट में माफिया के पास मौजूद था।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद: FAIMA ने की दोबारा परीक्षा की मांग
सड़कों पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच अब यह कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गई है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने एक जनहित याचिका दाखिल की है, जिसमें मांग की गई है कि:
-
पूरी परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाए।
-
जांच की निगरानी सीधे सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जाए।
-
NTA की भूमिका की जांच हो और भविष्य के लिए एक अधिक पारदर्शी व तकनीकी रूप से सुरक्षित संस्था का गठन किया जाए।
23 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर
इस घोटाले ने करीब 23 लाख छात्रों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। परीक्षा रद्द होने और दोबारा तैयारी करने के मानसिक दबाव ने छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। फिलहाल CBI ने 150 से अधिक संदिग्धों पर शिकंजा कसा है, जिनमें से 20 मुख्य आरोपियों को जल्द ही आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा सकती है।
voice of india
