Monday , 14 September 2026

NEET UG 2026 : नासिक के ‘शैडो सर्वर’ और हाई-टेक स्कैनर से रची गई साजिश, राजस्थान से मास्टरमाइंड मनीष यादव गिरफ्तार…लीक के बाद कहां-कहां पहुंचा पेपर?

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG 2026) में हुई धांधली ने देशभर के शिक्षा जगत को हिला कर रख दिया है। जांच एजेंसियों की रडार पर अब महाराष्ट्र का नासिक शहर है, जिसे इस पूरे घोटाले का ‘कंट्रोल रूम’ बताया जा रहा है। यहां से न केवल पेपर लीक हुआ, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर इसे चंद मिनटों में देश के 6 से ज्यादा राज्यों में फैला दिया गया। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ताओं को दबोच लिया है।

जयपुर से मास्टरमाइंड गिरफ्तार, अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़

राजस्थान SOG ने मंगलवार को बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए कथित मास्टरमाइंड मनीष यादव को जयपुर से हिरासत में लिया है। मनीष के साथ ही उसके करीबी सहयोगी राकेश मंडावरिया को भी पकड़ा गया है, जिस पर लीक हुए प्रश्नपत्रों को अलग-अलग राज्यों में बांटने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों की गिरफ्तारी से हरियाणा, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर तक फैले एक विशाल ‘एग्जाम माफिया’ नेटवर्क की कड़ियां जुड़ गई हैं।

नासिक ऑपरेशन: 30 मिनट की सेंध और हाई-डेफिनिशन स्कैनिंग

जांच में सामने आया है कि पेपर लीक करने के लिए किसी साधारण कैमरे का नहीं, बल्कि हाई-डेफिनिशन पोर्टेबल स्कैनर का इस्तेमाल किया गया था।

  • कूरियर सर्विस पर शक: एक निजी कूरियर कंपनी के कर्मचारी ने कथित तौर पर सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए प्रश्नपत्रों वाले ट्रंक को करीब 30 मिनट तक खुला छोड़ा।

  • डिजिटल कॉपी: इसी आधे घंटे के भीतर पेपर को स्कैन कर उसकी क्लियर डिजिटल इमेज बनाई गई।

  • AI को चकमा: NTA की AI मॉनिटरिंग से बचने के लिए नासिक के बाहरी इलाके में एक ‘शैडो सर्वर’ का इस्तेमाल किया गया। डेटा ट्रांसफर के लिए एक स्थानीय IT स्टार्टअप की लीज्ड लाइन का सहारा लिया गया ताकि इंटरनेट ट्रैफिक सामान्य लगे और किसी को शक न हो।

परीक्षा से 42 घंटे पहले तैयार था ‘केमिस्ट्री’ का सेट

हैरान करने वाली बात यह है कि लीक किया गया पेपर परीक्षा से लगभग 42 घंटे पहले ही माफिया के हाथों में पहुंच चुका था। जांच के अनुसार, लीक हुए सेट के 120 केमिस्ट्री के प्रश्न असली पेपर से हूबहू मैच करते हैं। नासिक में तैयार हुई इस पहली डिजिटल कॉपी को सबसे पहले हरियाणा भेजा गया, जहां से यह टेलीग्राम के ‘प्राइवेट माफिया’ ग्रुप्स के जरिए पूरे देश में फैल गया।

कोचिंग माफिया और मास्टरमाइंड की सांठगांठ

एजेंसियां अब नासिक के एक बड़े कोचिंग संस्थान के संचालक और राजस्थान के मास्टरमाइंड मनीष यादव के बीच के ‘ब्लाइंड लिंक’ की तलाश कर रही हैं। प्रारंभिक जांच बताती है कि इन दोनों ने मिलकर परीक्षा की लॉजिस्टिकल सुरक्षा में सेंध लगाई थी। कूरियर कंपनी से लेकर कोचिंग सेंटर तक, इस साजिश में कई सफेदपोश चेहरों के शामिल होने की आशंका है।

22 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर

इस साल करीब 22 लाख छात्रों ने डॉक्टर बनने के सपने के साथ नीट की परीक्षा दी थी। पेपर लीक की इन खबरों ने मेहनती छात्रों और उनके अभिभावकों का मनोबल तोड़ दिया है। जहां एक ओर सुप्रीम कोर्ट और सरकार जांच की निगरानी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर छात्र ‘री-नीट’ और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर सड़कों पर हैं।

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