Sunday , 2 August 2026

NEET UG 2026 कैंसिल: लाखों छात्रों का भविष्य अधर में, जानें MBBS एडमिशन और काउंसलिंग पर क्या होगा असर?

मेडिकल की पढ़ाई का सपना देख रहे देशभर के लाखों छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अनियमितताओं और पेपर लीक के पुख्ता सबूतों के आधार पर 3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET-UG 2026 परीक्षा को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है। इस फैसले ने न केवल परीक्षा की शुचिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भविष्य की तैयारियों में जुटे छात्रों को भी गहरे संकट में डाल दिया है।

काउंसलिंग और नए सत्र में होगी भारी देरी

नीट परीक्षा रद्द होने का सीधा असर अब मेडिकल एडमिशन की प्रक्रिया पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से MBBS, BDS और AYUSH कोर्सों के लिए होने वाली काउंसलिंग अब कम से कम 2 महीने पिछड़ सकती है। इसका परिणाम यह होगा कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 अपने निर्धारित समय से काफी देरी से शुरू होगा। यह देरी छात्रों के करियर ग्राफ और मेडिकल कॉलेजों के एकेडमिक कैलेंडर को पूरी तरह प्रभावित करेगी।

मेरिट लिस्ट का बदलेगा समीकरण, छात्रों की बढ़ी टेंशन

परीक्षा दोबारा होने का मतलब है कि पुरानी ऑल इंडिया रैंक और स्कोर अब पूरी तरह अमान्य हो चुके हैं। जिन छात्रों ने 3 मई की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया था और टॉप मेडिकल कॉलेजों में सीट पक्की मान ली थी, उन्हें अब जीरो से शुरुआत करनी होगी। नई परीक्षा के बाद एक नई मेरिट लिस्ट तैयार होगी, जिससे कॉम्पिटिशन और रैंकिंग का पूरा गणित बदल सकता है।

NTA कराएगा री-एग्जाम: बिना फीस दोबारा परीक्षा का मौका

NTA ने स्पष्ट किया है कि रद्द हुई परीक्षा के स्थान पर अब NEET UG 2026 री-एग्जाम आयोजित किया जाएगा। राहत की बात यह है कि जो छात्र पहले रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं, उन्हें दोबारा फॉर्म भरने या एक्स्ट्रा फीस देने की जरूरत नहीं होगी। पुराने आवेदन के आधार पर ही नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। हालांकि, परीक्षा की नई तारीखों का ऐलान जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर किया जाएगा, जिसका छात्र बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य पर संकट

लगातार तैयारी और फिर परीक्षा रद्द होने की खबर ने छात्रों को मानसिक रूप से झकझोर दिया है। कई छात्रों का कहना है कि दोबारा उसी दबाव में परीक्षा देना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी। सोशल मीडिया पर भी ‘जस्टिस फॉर नीट स्टूडेंट्स’ जैसे अभियान तेज हो गए हैं। अभिभावकों की चिंता यह है कि बार-बार होने वाली ऐसी गड़बड़ियां उनके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। अब सबकी नजरें एनटीए के अगले कदम और परीक्षा की नई तारीखों पर टिकी हैं।


 

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