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NEET UG धांधली में EOU का बड़ा खुलासा: ‘स्कॉलर’ बनकर बैठे थे एक दर्जन मेडिकल छात्र, सम्राट ने उगले दो दर्जन नाम; बेऊर जेल भेजे गए दोनों भाई

पटना  : नीट यूजी (NEET UG) पुनर्परीक्षा में कथित धांधली और मुन्नाभाई सिंडिकेट की जांच कर रही बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के हाथ कई अहम और चौंकाने वाले सुराग लगे हैं। पुलिस रिमांड पर लिए गए पावापुरी मेडिकल कॉलेज के छात्र डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट और उसके भाई अश्विनी कुमार से मैराथन पूछताछ में परीक्षा फर्जीवाड़े में शामिल एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ में मूल अभ्यर्थियों, ‘स्कॉलर’ के रूप में परीक्षा देने वाले मेडिकल छात्रों और परीक्षा केंद्रों पर तैनात बायोमीट्रिक वेंडरों समेत दो दर्जन से अधिक संदिग्धों की सीधी संलिप्तता सामने आई है।

तस्वीरें दिखाकर कराई गई पहचान, एक दर्जन मेडिकल छात्र शामिल पूछताछ के दौरान ईओयू की विशेष जांच टीम ने डॉ. रविशंकर को कई संदिग्धों की तस्वीरें दिखाईं। इनमें मूल परीक्षार्थियों, दूसरे की जगह परीक्षा में बैठने वाले मेडिकल छात्रों और बायोमीट्रिक कर्मचारियों की तस्वीरें शामिल थीं। सूत्रों के मुताबिक, रविशंकर ने तस्वीरों के जरिए दो दर्जन से अधिक लोगों की पहचान पुख्ता की है, जिनमें लगभग एक दर्जन विभिन्न राज्यों के मेडिकल छात्र हैं। इन छात्रों को मोटी रकम का लालच देकर मूल अभ्यर्थियों के स्थान पर ‘सॉल्वर/स्कॉलर’ बनाकर परीक्षा केंद्रों में बैठाया गया था। पूछताछ पूरी होने के बाद दोनों भाइयों को पटना की बेऊर जेल भेज दिया गया है।

2022 से सक्रिय था सिंडिकेट, हवलदार भर्ती में भी की थी सेंधमारी की कोशिश पूछताछ में डॉ. रविशंकर ने स्वीकार किया कि वह वर्ष 2022 से ही नीट और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करने वाले नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इससे पहले एमबीबीएस परीक्षा में हुई गड़बड़ी के एक मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए उसे अदालत से राहत मिली हुई थी। जांच में यह भी सामने आया कि इसी अवधि के दौरान उसने बायोमीट्रिक वेंडरों के साथ साठगांठ कर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) की हवलदार अनुदेशक परीक्षा में भी धांधली की नाकाम कोशिश की थी।

अश्विनी के फ्लैट से मिले अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज और जाली प्रमाण पत्र जांच एजेंसी द्वारा अश्विनी कुमार के ठिकाने पर की गई छापेमारी में कई अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, फर्जी आय, जाति और दिव्यांगता प्रमाण पत्र से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए थे। ईओयू ने पूछताछ में इन दस्तावेजों और संबंधित अभ्यर्थियों के साथ किए गए वित्तीय सौदों की गहन पड़ताल की है।

भविष्य में CBT आधारित परीक्षा के लिए भी कर ली थी ऑनलाइन सेंटर से सेटिंग पूछताछ के दौरान अश्विनी कुमार ने एक और बड़ा खुलासा किया। उसने स्वीकार किया कि भविष्य में नीट परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित किए जाने की संभावनाओं को भांपते हुए उसने पहले ही एक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र के साथ गोपनीय अनुबंध (टाई-अप) कर लिया था। ईओयू अब इस ऑनलाइन सेंटर और इसके संचालक नेटवर्क की भूमिका की भी तकनीकी जांच कर रही है।

कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की तैयारी, जल्द होंगी गिरफ्तारियां डॉ. रविशंकर और अश्विनी से मिले महत्वपूर्ण इनपुट और पहचान के आधार पर ईओयू की स्पेशल टीमें अब बड़े एक्शन की तैयारी में हैं। मूल अभ्यर्थियों, फर्जीवाड़ा करने वाले मेडिकल छात्रों और बायोमीट्रिक कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए बिहार के अलावा अन्य राज्यों के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

 

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