गुवाहाटी/अहमदाबाद। देश के दो प्रमुख राज्यों—असम और गुजरात—में कुदरत ने कहर बरपाया हुआ है। मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान के कारण आई भयावह बाढ़ ने दोनों राज्यों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों राज्यों में बाढ़ और बारिश से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 93 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लाखों लोग बेघर और प्रभावित हुए हैं। दोनों ही राज्यों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाए जा रहे हैं और सेना, एनडीआरएफ (NDRF) व एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं।
असम: ब्रह्मपुत्र और सहायक नदियां उफान पर, 62 लोगों की मौत
असम में बाढ़ का संकट लगातार विकराल रूप धारण कर रहा है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 62 तक पहुंच चुका है। सबसे ज्यादा तबाही पूर्वोत्तर असम के शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में देखने को मिली है।

7 लाख से अधिक आबादी प्रभावित, 12 जिले जलमग्न
राज्य के 12 प्रमुख जिले—शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, होजाई, नगांव, बिस्वनाथ, धेमाजी, सोनितपुर, कामरूप (मेट्रो) और कार्बी आंगलोंग—बाढ़ के पानी से गंभीर रूप से घिरे हुए हैं।
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शिवसागर: सर्वाधिक प्रभावित जिला, जहां अकेले करीब 3.48 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
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चराइदेव और जोरहाट: चराइदेव में 1.88 लाख और जोरहाट में 1.26 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
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गांव व राजस्व मंडल: 850 से अधिक गांव और 37 राजस्व मंडल पूरी तरह प्रभावित हुए हैं।
कृषि और पशुधन को भीषण क्षति
बाढ़ का पानी खेतों में घुस जाने से 56,606 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। इसके अलावा पिछले 24 घंटों में 17,000 से अधिक मवेशी और पोल्ट्री बह गए हैं, जबकि 3.34 लाख से अधिक पशुधन प्रभावित हुए हैं।
बादल फटने से बिगड़े हालात
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, पड़ोसी राज्य नागालैंड के ऊपरी इलाकों में हुई बादल फटने की घटनाओं और अत्यधिक मूसलाधार बारिश की वजह से नदियां खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं। राज्य भर में स्थापित 363 राहत शिविरों में 3.15 लाख से ज्यादा लोग शरण लिए हुए हैं।
गुजरात: दक्षिण गुजरात में भारी तबाही, 31 की जान गई
दूसरी ओर, गुजरात में भी मानसून के भारी प्रकोप के चलते स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, डूबने और बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं में अब तक 31 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
नवसारी और वलसाड बने तबाही का केंद्र
दक्षिण गुजरात के जिलों में बारिश थमने के बाद जब पानी उतरा, तो तबाही के खौफनाक निशान सामने आए।
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मृतकों के आंकड़े: सबसे ज्यादा 15 मौतें अकेले नवसारी जिले में दर्ज की गई हैं। इसके अलावा वलसाड में 7, खेड़ा में 4, अमरेली व सूरत में 2-2 तथा आनंद जिले में 1 व्यक्ति की मौत हुई है।
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7 फीट तक भरा पानी: वलसाड के कई इलाकों में 7 फीट तक पानी भर गया था, जिससे घरों, दुकानों और अनाज-तेल के गोदामों में रखा सामान पूरी तरह नष्ट हो गया है। पानी उतरने के बाद सड़कों पर कीचड़, मलबे और प्लास्टिक कचरे का अंबार लगा हुआ है।
38 हजार लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट, हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू
गुजरात प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए अब तक 38,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। इनमें से अधिकतर लोगों ने रिश्तेदारों के यहां शरण ली है, जबकि 2,000 से ज्यादा लोगों को सरकारी शेल्टर होम में ठहराया गया है।
नवसारी के मेंधर गांव में फंसे 60 झींगा फार्म कर्मियों को भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के हेलीकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट कर सुरक्षित निकाला गया। सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कई टुकड़ियां लगातार राहत कार्यों में लगी हुई हैं।
रेल यातायात ठप, 50 से अधिक ट्रेनें रद्द
भारी जलभराव और पटरियों के क्षतिग्रस्त होने के कारण गुजरात में रेल नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 50 से ज्यादा ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जबकि 25 से अधिक ट्रेनों को उनके गंतव्य से पहले ही समाप्त (Short-terminate) करना पड़ा है।
मौसम विभाग ने दोनों राज्यों के प्रभावित इलाकों में सतर्कता बरतने की सलाह दी है और प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
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