Saturday , 18 April 2026

लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर ‘महाभारत’: 850 सीटों का प्रस्ताव, अमित शाह का सपा को करारा जवाब

नई दिल्ली: संसद के निचले सदन लोकसभा में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक और हंगामेदार रहा। केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन बेहद महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग को तेज कर दिया। जहां सरकार इसे ‘नारी शक्ति’ के सशक्तिकरण का बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए मोर्चा खोल दिया है।

विपक्ष का ‘संविधान हाइजैक’ का आरोप और मुस्लिम कोटे की मांग

जैसे ही सदन में विधेयक पेश किए गए, विपक्षी खेमे ने विरोध के स्वर बुलंद कर दिए। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने तीखा हमला बोलते हुए सरकार पर संविधान को “हाइजैक” करने का आरोप लगाया। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद धर्मेंद्र यादव ने आरक्षण के भीतर मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग प्रावधान की मांग की। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि आधी आबादी के हक की बात अधूरी है जब तक इसमें मुस्लिम महिलाओं का स्थान स्पष्ट न हो।

“धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक”: अमित शाह का दोटूक जवाब

विपक्ष की मांगों पर पलटवार करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता और ऐसा करने का सवाल ही नहीं उठता। अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए शाह ने कहा, “यदि समाजवादी पार्टी को इतनी ही चिंता है, तो वह अपने कोटे की सभी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, उन्हें किसने रोका है?”

नई लोकसभा का स्वरूप: 850 सांसद और 273 महिला सीटें

प्रस्तावित संशोधनों में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत हैं। नए विधेयक के अनुसार:

  • कुल सीटें: लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।

  • राज्यों का हिस्सा: राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें तय की जाएंगी।

  • महिला आरक्षण: परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

मत विभाजन में सरकार की जीत, ओवैसी और DMK का कड़ा विरोध

विधेयकों को पेश करने के दौरान विपक्ष ने ध्वनि मत के बजाय ‘मत विभाजन’ (Voting) की मांग की। मतदान के दौरान सरकार के पक्ष में 207 वोट पड़े, जबकि 126 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे संघीय ढांचे पर हमला बताया। वहीं, डीएमके सांसद टीआर बालू ने इन विधेयकों को “सैंडविच बिल” करार देते हुए कहा कि तीनों बिलों को आपस में उलझा दिया गया है।

बहस के अंत में जनगणना के मुद्दे पर भी टकराव हुआ। अखिलेश यादव के आरोपों पर गृह मंत्री ने आश्वस्त किया कि देश में जनगणना की प्रक्रिया जारी है और आने वाले समय में इसमें जातीय आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे। फिलहाल, इन विधेयकों ने देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।

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