वृंदावन: मायानगरी मुंबई की रंगीन दुनिया, नाम, शोहरत और ऐश-ओ-आराम की जिंदगी को ठुकराकर एक और अभिनेत्री ने अध्यात्म की राह चुन ली है। टीवी सीरियल ‘देखा एक ख्वाब’ से घर-घर में अपनी पहचान बनाने वालीं मशहूर अभिनेत्री एना जयसिंघानी अब साध्वी एना परी हरिवंशी बन गई हैं। एना ने न केवल एक्टिंग करियर को अलविदा कहा, बल्कि वृंदावन को अपना स्थाई ठिकाना बना लिया है। अब उनके हाथों में कंठी माला है और जुबां पर केवल ‘राधा-नाम’ का जाप।
माथे पर तिलक और सादगी भरा जीवन: ऐसे बदली दिनचर्या
एना जयसिंघानी की जिंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी है। ग्लैमरस कपड़ों की जगह अब वह सादे वस्त्रों में नजर आती हैं। उन्होंने तामसी भोजन यानी प्याज-लहसुन का पूरी तरह त्याग कर दिया है और शुद्ध शाकाहारी जीवन अपना लिया है। अभिनेत्री से साध्वी बनीं एना अब अपना अधिकतम समय भगवान की भक्ति और नाम-जप में बिताती हैं। उनके माथे पर लगा चंदन और हाथों में घूमती जपमाला उनके भीतर आए गहरे आध्यात्मिक बदलाव की गवाही देते हैं।
इस्कॉन और भगवत गीता ने दिखाया भक्ति का मार्ग
एना के इस हृदय परिवर्तन की शुरुआत इस्कॉन मंदिर से हुई। उन्होंने बताया कि दोस्तों के सुझाव पर जब उन्होंने इस्कॉन जाना शुरू किया, तो उन्हें नाम-जप और सात्विक जीवन की सलाह मिली। धीरे-धीरे उनकी रुचि भगवत गीता की कक्षाओं में बढ़ने लगी। पुणे के इस्कॉन मंदिर में सेवा करते हुए उन्हें अहसास हुआ कि प्रभु की प्राप्ति के लिए एक सच्चे गुरु का होना अनिवार्य है। लगभग दो साल की मानसिक कश्मकश के बाद राधा रानी की कृपा से उन्हें गुरु का मार्गदर्शन मिला।
सपने में आए प्रेमानंद महाराज और फिर वृंदावन ही हो गया ठिकाना
अपनी दीक्षा के बारे में बताते हुए एना ने एक दिलचस्प वाकया साझा किया। उन्होंने बताया, “एक रात मेरे सपने में संत प्रेमानंद जी महाराज आए।” इसके बाद वह महाराज के प्रवचनों से जुड़ गईं। वृंदावन आने का मौका उन्हें तब मिला जब ‘माधवा श्रॉफ बैंड’ को सोशल मीडिया हैंडलर की जरूरत थी। वृंदावन पहुँचने के बाद उन्होंने आश्रम के नियमों का पालन किया, 10 महीने तक धार्मिक पुस्तकें पढ़ीं और कठिन परीक्षा पास की। अंततः बसंत पंचमी के पावन अवसर पर पूज्य प्रेमानंद जी महाराज ने उन्हें नाम-जप की दीक्षा देकर अपना लिया।
ग्वालियर से मुंबई और फिर ‘देखा एक ख्वाब’ तक का सफर
ग्वालियर में जन्मी एना जयसिंघानी को बचपन से ही डांस, पेंटिंग और एक्टिंग का शौक था। उन्होंने ग्वालियर में बच्चों को डांस भी सिखाया। अभिनय के सपने को पूरा करने के लिए उनके पिता उन्हें मुंबई ले गए, जहाँ उन्होंने बालाजी टेलीफिल्म्स से एक्टिंग का कोर्स किया। ‘मिसेज कौशिक की पांच बहुएं’ से करियर की शुरुआत करने वाली एना को असली पहचान टीवी शो ‘देखा एक ख्वाब’ से मिली। लेकिन इतनी प्रसिद्धि पाने के बाद भी उनके मन को शांति नहीं मिली, जिसकी तलाश उन्हें बांके बिहारी की शरण में ले आई।
“अब कोई ख्वाहिश नहीं, बस श्रीजी की सेवा है”
साध्वी एना अब वृंदावन में किराए का फ्लैट लेकर रहती हैं और अपने घर में ‘श्रीजी’ (राधा रानी) की सेवा करती हैं। वह वर्तमान में माधवा बैंड के सोशल मीडिया हैंडलर के तौर पर काम करते हुए अपना जीवन निर्वाह कर रही हैं। एना का कहना है कि अब उनके मन में सांसारिक सुखों की कोई इच्छा शेष नहीं है। उनके माता-पिता भी अक्सर उनके पास वृंदावन आते रहते हैं और बेटी के इस निर्णय से खुश हैं।
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