
ज्योतिष डेस्क: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी जातक की जन्मकुंडली उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। जन्म के समय आकाश मंडल में ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों की जो स्थिति होती है, वही जातक के जीवन के सुख और संघर्षों की रूपरेखा तय करती है। एक कुशल ज्योतिषाचार्य ग्रहों के इन्हीं समीकरणों को देखकर भविष्यवाणी करते हैं। यदि कुंडली में ग्रह उच्च और शुभ स्थिति में हों, तो कुछ ऐसे दुर्लभ राजयोग बनते हैं जो व्यक्ति को धन, मान-सम्मान और समाज में ऊंचा ओहदा दिलाते हैं। आज हम बात करेंगे उन योगों की, जो व्यक्ति को IAS या PCS जैसे उच्च प्रशासनिक पदों पर आसीन करते हैं।
सूर्य का ‘राजा’ जैसा प्रभाव: अधिकारी बनने की पहली शर्त
ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है। सूर्य आत्मा, मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता और उच्च पद के कारक हैं। यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य अपनी उच्च राशि (मेष) में स्थित हो और साथ में तीन-चार अन्य ग्रह भी मजबूत स्थिति में हों, तो ऐसा व्यक्ति निश्चित रूप से एक बड़ा प्रशासनिक अधिकारी बनता है। ऐसे लोग न केवल समाज में लोकप्रिय होते हैं, बल्कि अपनी अद्भुत कार्यक्षमता से जटिल कार्यों को भी आसानी से सुलझा लेते हैं।
लग्न और दशम भाव का मजबूत होना है जरूरी
प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए कुंडली का लग्न (स्वयं) और दशम भाव (कर्म क्षेत्र) का बलि होना अनिवार्य है। यदि लग्न मजबूत हो और दशम भाव पर दशमेश (दशम भाव के स्वामी) की शुभ दृष्टि हो, तो व्यक्ति कम उम्र में ही सरकारी नौकरी प्राप्त कर लेता है। इसके अलावा, यदि ग्रहों के बीच ‘द्विद्रावादश योग’ बन रहा हो, तो जातक उच्च पदों पर आसीन होता है और उसकी ख्याति सात समंदर पार तक पहुँचती है। ऐसे लोग अपनी बुद्धि और कौशल से सरकारी व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं।
शनि और मंगल का संगम दिलाता है बड़ी सफलता
उच्च अधिकारी बनने में शनि और मंगल की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि शनि ग्रह नवम भाव (भाग्य स्थान) में हो और दशम भाव में मकर राशि स्थित हो, साथ ही नवांश कुंडली के दशम भाव में मंगल विराजमान हो, तो व्यक्ति प्रशासनिक सेवा के शीर्ष पर पहुँचता है। वहीं, यदि बुध, गुरु और शुक्र कुंडली के पंचम भाव में हों, तो जातक अत्यंत साहसी और आत्मविश्वास से लबालब होता है। ऐसे लोग कठिन से कठिन परीक्षाओं को अपनी एकाग्रता से पास कर लेते हैं।
राजसुख के कारक ग्रहों का अद्भुत मेल
जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राजसुख के कारक ग्रह सूर्य केंद्र भाव में अपनी उच्च राशि या उच्च नवांश में हों और दशमेश का संबंध लाभ भाव, लग्नेश या भाग्येश से हो, तो प्रशासनिक सेवा का द्वार खुल जाता है। ऐसे लोग स्वाभिमानी होते हैं और अपनी मेहनत के दम पर सफलता की नई इबारत लिखते हैं। इसके अलावा, चंद्रमा से तीसरे स्थान पर मंगल और शनि से सप्तम भाव में शुक्र और गुरु की विशिष्ट स्थिति व्यक्ति को समाज में एक शक्तिशाली प्रशासक के रूप में स्थापित करती है।
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