लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हर साल आंधी-तूफान, बिजली गिरने और भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाएं कहर बरपाती हैं। इन आपदाओं में न केवल जान-माल का नुकसान होता है, बल्कि कई परिवार पूरी तरह सड़क पर आ जाते हैं। संकट की इस घड़ी में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पीड़ितों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ बनकर खड़ी है। सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के तहत आर्थिक सहायता के कड़े मानक तय किए हैं, ताकि प्रभावित परिवारों को दोबारा पैरों पर खड़ा होने में मदद मिल सके।
जनहानि होने पर मृतक के आश्रितों को 4 लाख की मदद
प्राकृतिक आपदा के दौरान सबसे दुखद स्थिति किसी सदस्य को खोना है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये की एकमुश्त अनुग्रह राशि प्रदान करती है। यह राशि राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) या मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से घायल होता है, तो अस्पताल के खर्च के साथ-साथ चोट की गंभीरता के आधार पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता का भी प्रावधान है।
मकान गिरने या क्षतिग्रस्त होने पर क्या है सरकारी प्रावधान?
अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि क्या सरकार नया घर बनाकर देती है? स्पष्ट कर दें कि सरकार घर बनाकर देने के बजाय नकद मुआवजा देती है।
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पक्का मकान: यदि समतल क्षेत्र में पक्का मकान पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है, तो करीब 1.20 लाख रुपये की सहायता दी जाती है।
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कच्चा मकान: नुकसान की तीव्रता को देखते हुए 15 हजार से 65 हजार रुपये तक की राहत राशि मिलती है।
आंशिक क्षति की स्थिति में भी सर्वे के बाद निर्धारित सहायता दी जाती है। इसके अलावा, जो परिवार पूरी तरह बेघर हो जाते हैं, उन्हें वरीयता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़ने की कोशिश की जाती है।
किसानों के लिए फसल और गाद हटाने का मुआवजा
खेती-किसानी पर कुदरत की मार पड़ने पर सरकार ने मुआवजे के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। यदि 33 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद होती है, तो किसानों को निम्नलिखित दर से मदद मिलेगी:
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वर्षा सिंचित क्षेत्र: 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।
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सुनिश्चित सिंचित क्षेत्र: 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर।
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बारहमासी फसलें (बागवानी आदि): 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।
इसके अलावा, खेतों में जमा होने वाले मलबे और गाद को हटाने के लिए भी सरकार 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की आर्थिक मदद दे रही है।
पशुपालकों को संबल: पशु की मृत्यु पर भी आर्थिक सहायता
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुओं की हानि पर भी योगी सरकार ने खजाना खोल दिया है:
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दुधारू पशु (गाय/भैंस): 37,500 रुपये प्रति पशु।
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गैर-दुधारू पशु (बैल/घोड़ा): 32,000 रुपये।
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छोटे पशु (बछड़ा/गधा/खच्चर): 20,000 रुपये।
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भेड़/बकरी/सुअर: 4,000 रुपये प्रति पशु।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि आपदा के 24 से 48 घंटों के भीतर सर्वे पूरा कर DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से राहत राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाए। सरकार की इस मुस्तैदी का उद्देश्य आपदा प्रभावितों को त्वरित न्याय और सहायता सुनिश्चित करना है।
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