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कानपुर लैम्बोर्गिनी कांड: तंबाकू किंग केके मिश्रा का बेटा शिवम गिरफ्तार, ड्राइविंग सीट से निकलने वाला वीडियो बना काल, ‘ड्राइवर’ वाला दांव फेल

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कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर के बहुचर्चित लैम्बोर्गिनी हादसे में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। 8 फरवरी को वीआईपी रोड पर हुए इस भीषण हादसे ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया था। हाई-प्रोफाइल मामला होने के कारण इस पर सबकी नजरें टिकी थीं। पुलिस ने शिवम को कानपुर से ही दबोचा है, जबकि उसके पिता लगातार दावा कर रहे थे कि उनका बेटा दिल्ली में इलाज करा रहा है।

करोड़ों की लैम्बोर्गिनी ने वीआईपी रोड पर मचाया था तांडव

यह पूरा मामला 8 फरवरी का है, जब करोड़ों रुपये की कीमत वाली तेज रफ्तार लैम्बोर्गिनी कार वीआईपी रोड पर अनियंत्रित हो गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि ड्राइवर उस पर काबू नहीं रख सका और उसने कई लोगों को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के तुरंत बाद कार सवार मौके से फरार होने की कोशिश करने लगे, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बना लिया जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

सीसीटीवी और वायरल वीडियो ने खोली झूठ की पोल

हादसे के बाद से ही पुलिस और कारोबारी परिवार के बीच ‘ड्राइवर कौन था’ को लेकर खींचतान चल रही थी। शिवम मिश्रा के पक्ष का दावा था कि कार उनका चालक मोहन चला रहा था। बुधवार को मोहन नामक व्यक्ति ने अदालत में आत्मसमर्पण की कोशिश करते हुए खुद को दोषी बताया था। हालांकि, डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव की टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस दावे को खारिज कर दिया। वायरल वीडियो में साफ देखा गया कि हादसे के तुरंत बाद शिवम मिश्रा ही ड्राइविंग सीट से बाहर निकल रहा था। सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों ने भी पुष्टि की कि स्टयरिंग शिवम के ही हाथ में था।

अदालत में समझौते की कोशिश भी नहीं आई काम

कारोबारी केके मिश्रा और उनके अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह ने बचाव की पूरी कोशिश की थी। मामले में पीड़ित तौफीक और कथित चालक मोहन के बीच समझौते की बात भी सामने आई थी। तौफीक ने बयान दिया था कि उसे आर्थिक क्षतिपूर्ति मिल गई है और वह मोहन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहता। लेकिन पुलिस ने इसे ‘डमी ड्राइवर’ का मामला मानते हुए कानूनी शिकंजा ढीला नहीं होने दिया। पुलिस का मानना है कि रसूख के दम पर असली गुनहगार को बचाने के लिए ड्राइवर को आगे किया गया था।

बीमारी का बहाना और पुलिस की दबिश

केके मिश्रा ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि शिवम हादसे के वक्त कार में नहीं था और वह फिलहाल दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती है। लेकिन पुलिस की सर्विलांस टीम ने उसकी लोकेशन कानपुर में ही ट्रैक की। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। शिवम को आज ही कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी रिमांड की मांग कर सकती है। इस गिरफ्तारी के बाद अब उन लोगों पर भी सवाल उठ रहे हैं जिन्होंने हलफनामा देकर झूठे चालक को बचाने की कोशिश की थी।

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