कानपुर। मानवता को शर्मसार करने वाले अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट की जांच में एक चौंकाने वाला मोड़ आया है। पुलिस महकमे के ही कुछ ‘विभीषणों’ की वजह से मुख्य आरोपी डॉ. अफजल और डॉ. अमित पुलिस की गिरफ्त में आने से बाल-बाल बच गए। सर्विलांस की सटीक लोकेशन पर जब पुलिस टीम मेरठ पहुंची, तो छापेमारी से महज कुछ मिनट पहले ही आरोपियों को सूचना मिल गई और वे फरार हो गए। अब पुलिस की टीमें गाजियाबाद और दिल्ली-एनसीआर में डेरा डाले हुए हैं।
किडनी सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई में जुटी कमिश्नरेट पुलिस उस वक्त हैरान रह गई जब मेरठ के ठिकाने पर दबिश देने से पहले ही आरोपी वहां से निकल चुके थे। जांच में सामने आया है कि विभाग के ही किसी मुखबिर ने डॉ. अफजल और डॉ. अमित उर्फ अनुराग तक पुलिस एक्शन की जानकारी पहुंचा दी थी। कुछ घंटों बाद इनकी लोकेशन गाजियाबाद में मिली है। आला अफसर अब उस ‘खाकी वाले गद्दार’ की शिनाख्त करने में जुटे हैं जिसने अपराधियों की मदद की। इस बीच, सिंडिकेट के मास्टरमाइंड डॉ. रोहित के दो मोबाइल नंबर मिले हैं, जो फिलहाल बंद हैं।
डॉ. रोहित की CDR खोल देगी सफेदपोशों के राज
पुलिस की गिरफ्त में आए ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह और राजेश कुमार ने पूछताछ में कई राज उगले हैं। कुलदीप गाजियाबाद के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में 42 हजार की सैलरी पर तैनात था, जबकि राजेश नोएडा के एक अस्पताल में ओटी मैनेजर था। इन दोनों की मुलाकात डेढ़ साल पहले डॉ. रोहित से एक सेमिनार में हुई थी, जिसके बाद यह तिकड़ी किडनी की खरीद-फरोख्त के गंदे धंधे में शामिल हो गई। पुलिस अब डॉ. रोहित की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकलवा रही है, जिससे इस रैकेट में शामिल डॉ. सैफ, अखिलेश और शैलेंद्र जैसे नए किरदारों के चेहरे बेनकाब होंगे।
60 लाख में हुआ था सौदा, डोनर को मिले सिर्फ 6 लाख
जांच में पैसों के लेनदेन का एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। किडनी डोनर आयुष चौधरी का दावा है कि उसे 9.5 लाख रुपये का वादा किया गया था, लेकिन सिर्फ 6 लाख रुपये ही दिए गए। वहीं, इनपुट मिला है कि मुजफ्फरनगर के स्कूल संचालक विकास तोमर से उनकी पत्नी पारुल के ट्रांसप्लांट के लिए दलाल शिवम ने 15 लाख रुपये वसूले थे। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. अफजल और डॉ. रोहित के गैंग ने शिवम के साथ मिलकर कुल 60 लाख रुपये में यह सौदा तय किया था। पुलिस ने पारुल के पति विकास तोमर को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है।
उस काली रात आहूजा अस्पताल में होने थे दो ऑपरेशन!
पकड़े गए ओटी टेक्नीशियनों ने बताया कि 29 मार्च की रात केशवपुरम के आहूजा अस्पताल में सिर्फ पारुल ही नहीं, बल्कि एक और मरीज का किडनी ट्रांसप्लांट होना था। सर्जरी की जिम्मेदारी डॉ. अफजल पर थी और एनेस्थीसिया का काम डॉ. रोहित देख रहा था। पुलिस की सुगबुगाहट लगते ही सिंडिकेट एक ऑपरेशन के बाद ही भाग निकला। डॉ. रोहित एनेस्थीसिया एक्सपर्ट होने के नाते मरीज को होश आने तक रुकता था, जबकि बाकी टीम पहले ही निकल जाती थी। आरोपियों ने यह भी कबूल किया कि उन्होंने होली के बाद भी कानपुर की एक रेलवे क्रॉसिंग के पास किसी अस्पताल में अवैध ट्रांसप्लांट किया था।
‘मदद 24×7’ व्हाट्सएप ग्रुप से बिछाया दलाली का जाल
दलाल शिवम अग्रवाल ने किडनी डोनर खोजने के लिए ‘मदद 24×7’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था। शुरुआत में यह ग्रुप एंबुलेंस सेवा के नाम पर बना था, जिसमें कल्याणपुर और रावतपुर के कई अस्पताल संचालक जुड़े थे। बाद में शिवम इसी ग्रुप के जरिए हैलट (LLR) अस्पताल आने वाले गरीब मरीजों को बहला-फुसलाकर प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराने लगा और वहीं से किडनी की खरीद-बिक्री का खेल शुरू हुआ। इसी ग्रुप के माध्यम से वह आहूजा अस्पताल के संचालक दंपती के संपर्क में आया था।
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