Wednesday , 26 August 2026

आसमान में बढ़ेगी भारत की ताकत :  अब देश में ही बनेगा माउंट एवरेस्ट फतह करने वाला हेलीकॉप्टर….भारत-फ्रांस के बीच किन मसलों पर हुआ समझौता?

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मुंबई: भारत और फ्रांस की दोस्ती अब समंदर की गहराइयों से लेकर हिमालय की ऊंचाइयों तक नई इबारत लिख रही है। मुंबई में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक ने रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत कर दी है। AI इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेने पहुंचे राष्ट्रपति मैक्रों की यह चौथी भारत यात्रा मील का पत्थर साबित हुई है, जिसमें दोनों देशों ने रक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक जैसे अहम क्षेत्रों में 20 से अधिक समझौतों पर मुहर लगाई है।

एवरेस्ट की ऊंचाई नापने वाला हेलीकॉप्टर अब ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनेगा

इस बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग रही। पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने कर्नाटक में H125 हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन (FAL) का वर्चुअल उद्घाटन किया। आपको बता दें कि यह दुनिया का एकमात्र ऐसा हेलीकॉप्टर है जो माउंट एवरेस्ट की चोटी तक उड़ान भरने में सक्षम है। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस के इस साझा प्रयास से अब ये शक्तिशाली हेलीकॉप्टर भारत में बनेंगे और यहीं से पूरी दुनिया को निर्यात किए जाएंगे। इसके साथ ही भारत की BEL और फ्रांस की Safran मिलकर खतरनाक हैमर मिसाइलें बनाएंगी, जिससे भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

AI और हेल्थकेयर में छिड़ेगी नई क्रांति: AIIMS दिल्ली में खुलेगा खास सेंटर

तकनीक और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी भारत-फ्रांस की जुगलबंदी देखने को मिली है। AIIMS दिल्ली में ‘इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थ’ की शुरुआत की गई है, जो कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में AI की मदद लेगा। इसके अलावा डिजिटल साइंस के लिए एक नया रिसर्च सेंटर भी लॉन्च किया गया है। युवाओं को रोजगार के काबिल बनाने के लिए एयरोनॉटिक्स में ‘नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाने का निर्णय लिया गया है, जहां भारतीय युवाओं को विमानन क्षेत्र की विश्वस्तरीय ट्रेनिंग दी जाएगी।

इंडो-पैसिफिक में बढ़ेगी ताकत, चीन के तकनीकी वर्चस्व को चुनौती

बैठक के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों ने साफ तौर पर कहा कि तकनीक के क्षेत्र में किसी एक देश का एकाधिकार (Monopoly) नहीं होना चाहिए। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर काम करने और क्लीन एनर्जी व स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर जोर दिया। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने इस साझेदारी को वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी बताया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच का भरोसा अटूट है और यह दोस्ती आने वाले समय में दुनिया को नई दिशा दिखाएगी।

पुराने समझौतों को मिला 10 साल का विस्तार

रक्षा क्षेत्र में विश्वास की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दोनों देशों ने अपने पुराने रक्षा रोडमैप और समझौतों को अगले 10 सालों के लिए और बढ़ा दिया है। इसमें न केवल हथियारों की खरीद-फरोख्त शामिल है, बल्कि तकनीक का हस्तांतरण (Transfer of Technology) भी मुख्य हिस्सा है। सौर ऊर्जा से लेकर स्पेस रिसर्च तक, मोदी और मैक्रों की इस मुलाकात ने भारत को वैश्विक विनिर्माण (Manufacturing) का हब बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा दिया है।  प्राप्त करना चाहेंगे?

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