Saturday , 5 September 2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट: कोडीन कफ सिरप केस में जस्टिस कृष्ण पहल ने खुद को सुनवाई से किया अलग, जज से संपर्क की कोशिश पर बोले- ‘न्यायपालिका के इतिहास का. …

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी मामले से जुड़ी 74 जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही एकल पीठ के जज, जस्टिस कृष्ण पहल ने खुद को इन मामलों की सुनवाई से अलग (Recuse) कर लिया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस पहल ने बेहद कड़ी और तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायाधीश तक सीधी पहुंच बनाने या संपर्क साधने का कोई भी प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। उन्होंने इस घटना को न्यायालय के इतिहास का एक ‘काला दिन’ करार दिया।

चीफ जस्टिस को भेजीं 80 अर्जियां, नई पीठ के गठन के दिए निर्देश

भोला प्रसाद की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्ण पहल ने यह बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने जमानत अर्जी पर अंतिम आदेश जारी करने से पहले खुद को मामले से अलग कर लिया और संबंधित लगभग 80 जमानत अर्जियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के पास भेज दिया, ताकि इन्हें किसी अन्य उपयुक्त पीठ को सौंपा जा सके।

क्यों जज ने खुद को सुनवाई से किया अलग?

मिली जानकारी के अनुसार, जस्टिस कृष्ण पहल की अदालत में कोडीन कफ सिरप तस्करी से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी थी और केवल फैसला सुनाया जाना बाकी था। इसी दौरान आरोपी पक्षकार की ओर से कथित तौर पर पीठासीन जज से सीधे संपर्क साधने और पहुंच बनाने का प्रयास किया गया। कोर्ट ने इस हरकत को बेहद गंभीरता से लिया और कहा कि न्याय होना ही काफी नहीं है, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी उतना ही जरूरी है।

न्यायपालिका में जनता का विश्वास होगा कमजोर

जस्टिस पहल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि वह फैसला उसी पक्ष के हक में सुनाते, जिसका पक्ष सुनवाई के दौरान मजबूत लग रहा था, तब भी समाज में यह गलत संदेश और धारणा बन सकती थी कि फैसला किसी बाहरी दबाव या संपर्क के कारण आया है। उन्होंने कहा कि अगर इस प्रकार की हरकतों को नजरअंदाज किया गया, तो इससे न्यायपालिका पर आम जनता का भरोसा कमजोर होगा।

अब 7 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

न्यायिक गरिमा और निष्पक्षता को सर्वोपरि रखते हुए जस्टिस कृष्ण पहल ने सभी मामलों की फाइलें मुख्य न्यायाधीश को ट्रांसफर कर दी हैं। अब चीफ जस्टिस द्वारा गठित की जाने वाली नई पीठ इन सभी मामलों की सुनवाई करेगी। अदालत ने इन मामलों की अगली सुनवाई के लिए 7 अगस्त 2026 की तिथि तय की है।

Check Also

अंतरिक्ष में भारत की नई आंख: PSLV और GSLV में क्या है अंतर? समझिए दोनों रॉकेटों की ताकत

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि …