Tuesday , 28 July 2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैलसा….बालिग बेटे को पिता से भरण-पोषण का अधिकार नहीं

-इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, पत्नी का भरण पोषण बढ़ना उचित ठहराया

प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बेटे के बालिग होने पर पिता से भरण-पोषण का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने इस आधार पर 18 साल कुछ आयु पूरी कर चुके बेटे के पक्ष में परिवार कोर्ट की ओर से जारी भरण-पोषण के आदेश को रद्द कर दिया, जबकि दूसरी ओर पत्नी के लिए बढ़ाई गई भरण-पोषण राशि को उचित ठहराते हुए बरकरार रखा। यह आदेश जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की सिंगल बेंच ने याची पति मोअज्जम अली की ओर से दाखिल याचिका पर सुनाया है।

दरअसल, याची पति ने फैमिली कोर्ट भदोही के 4 अगस्त 2023 के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट के आदेश से पत्नी और बेटे के पक्ष में भरण-पोषण की राशि में बढ़ोतरी की गई थी। याची के वकील ने दलील पेश की और कहा कि याची को फैमिली कोर्ट से कोई नोटिस या समन कानूनी प्रक्रिया के तहत प्राप्त नहीं हुआ था। यह भी दलील दी कि बेटा जन्म प्रमाणपत्र के मुताबिक पांच जनवरी 2023 को ही बालिग हो चुका था। इसलिए उसके लिए भरण-पोषण का आदेश अवैध है। याची के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में कहा कि पर पांच बच्चों की जिम्मेदारी है। ऐसे में गुजारा-भत्ता राशि पत्नी के लिए 1,000 से बढ़ाकर 6,000 और बेटे के लिए 500 से अब 4,000 देना उसके लिए संभव नहीं है।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि बेटा बालिग हो चुका है। इस आधार पर कोर्ट ने उसके संबंध में जारी भरण-पोषण का आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, पत्नी के लिए बढ़ाई गई राशि 6,000 रुपए को कोर्ट ने मौजूदा समय के अनुसार अत्यधिक नहीं माना। हाईकोर्ट ने कहा कि पति ने अपनी आय के स्रोतों के संबंध में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं, जिससे उसकी असमर्थता सिद्ध हो सके। कोर्ट ने याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निस्तारित कर दिया।

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