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हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले को पौने नौ साल पहले दहला देने वाले सामूहिक हत्याकांड में आखिरकार इंसाफ हो गया है। छह माह की मासूम समेत एक ही परिवार के पांच लोगों की बेरहमी से हत्या करने वाले तीन दरिंदों को विशेष न्यायाधीश (डकैती कोर्ट) अनिल कुमार खरवार ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर 19-19 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले के बाद सालों से इंसाफ का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है।
एक मोबाइल फोन ने पहुंचाया कातिलों तक
यह सनसनीखेज वारदात हमीरपुर के मौदहा कस्बे में हुई थी, जिसने पूरे इलाके में खौफ पैदा कर दिया था। 13 मई 2017 को पुलिस को दी गई तहरीर के बाद मुख्य आरोपी जुगुल किशोर को गिरफ्तार तो कर लिया गया, लेकिन असली कातिल पुलिस की पकड़ से बाहर थे। मामले की परतें तब खुलीं, जब चार महीने बाद एसओजी प्रभारी को लूटे गए एक मोबाइल फोन की लोकेशन मिली। मोबाइल का ऑन होना ही हत्यारों के लिए ताबूत की आखिरी कील साबित हुआ। पुलिस ने फौरन एक टीम तैयार की और लोकेशन के आधार पर शहर के बड़ा चौराहा पर जाल बिछाया। पुलिस ने जैसे ही उस नंबर पर फोन मिलाया, चौराहे पर खड़े एक शख्स ने फोन उठाया और पुलिस ने उसे और उसके साथी को दौड़ाकर दबोच लिया। पकडे गए आरोपियों की पहचान कामता उर्फ अजय सिंह और मूलचंद्र उर्फ मुल्लू श्रीवास के रूप में हुई, और उनके पास से मिला मोबाइल फोन मृतका रानी देवी का था।
लालच, शराब और खौफनाक साजिश
पुलिस की सख्त पूछताछ में दोनों ने जो खुलासा किया, उसे सुनकर हर कोई कांप गया। उन्होंने बताया कि उनके ही गांव के पुष्पेंद्र सिंह ने उन्हें कृष्णपाल के घर में भारी मात्रा में सोना-चांदी और नकदी होने का लालच दिया था। 10 मई की शाम, तीनों लालच में अंधा होकर कृष्णपाल के घर पहुंचे। घर में बातचीत के दौरान ही कृष्णपाल की बेटी आकांक्षा ने अपने मामा पुष्पेंद्र से मजाकिया लहजे में पूछा, “मामा, शादी की पार्टी कब मिलेगी?” किसे पता था कि यह उसकी जिंदगी के आखिरी शब्द होंगे। साजिश के तहत, तीनों बाहर से दूध लाए और फिर कृष्णपाल से शराब पिलाने को कहा। तीन क्वार्टर शराब पीने के बाद जब कृष्णपाल नशे में हो गया, तो तीनों ने पहले गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद एक-एक कर आकांक्षा, उसकी मां रानी और नानी कुसुमा को भी मौत के घाट उतार दिया। छह महीने की मासूम को बिस्तर पर छोड़कर उन्होंने घर में लूटपाट की और जेवर, मोबाइल व नकदी लेकर फरार हो गए।
अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई करते हुए पुष्पेंद्र सिंह, मूलचंद्र उर्फ मुल्लू श्रीवास और कामता उर्फ अजय सिंह को इस जघन्य अपराध का दोषी पाया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
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