Saturday , 30 May 2026

Guru Pradosh Vrat 2026: आज महादेव और देवगुरु बृहस्पति की कृपा पाने का अद्भुत संयोग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और सटीक विधि

लखनऊ। हिंदू धर्म में महादेव की कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत को सर्वोत्तम माना गया है। मई 2026 का पहला प्रदोष व्रत आज, यानी 14 मई को गुरुवार के दिन पड़ रहा है। गुरुवार के संयोग के कारण इसे ‘गुरु प्रदोष व्रत’ कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ-साथ देवताओं के गुरु, बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए विशेष फलदायी है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन के समस्त कष्टों का अंत होता है।

आज शाम 7 बजे से शुरू होगा पूजा का विशेष मुहूर्त

प्रदोष व्रत में ‘प्रदोष काल’ यानी शाम के समय की पूजा का ही सर्वाधिक महत्व है। शास्त्रानुसार, सूर्यास्त के समय महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

  • गुरु प्रदोष व्रत तिथि: 14 मई 2026, गुरुवार

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 मई, सुबह 11:21 बजे से

  • त्रयोदशी तिथि समापन: 15 मई, सुबह 08:32 बजे तक

  • पूजा का शुभ समय (प्रदोष काल): शाम 07:04 बजे से रात 09:09 बजे तक

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

पूजा को निर्विघ्न संपन्न करने के लिए इन सामग्रियों को पहले ही एकत्रित कर लें:

  • अभिषेक हेतु: गंगाजल, शुद्ध जल, कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर (पंचामृत)।

  • पूजन सामग्री: सफेद चंदन, भस्म, अक्षत (साबुत चावल), बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, मन्दार (आक) के फूल और सफेद पुष्प।

  • अन्य वस्तुएं: कलावा, रुई की बत्ती, कपूर, धूप-अगरबत्ती, शुद्ध घी का दीपक, फल और नैवेद्य (मिठाई)।

प्रदोष व्रत की सरल एवं सटीक पूजा विधि

यदि आप आज का व्रत रख रहे हैं, तो इन चरणों का पालन कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं:

  1. सुबह का संकल्प: प्रातः काल स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक रहते हुए मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।

  2. प्रदोष काल की तैयारी: शाम को पूजा के मुहूर्त से पहले पुनः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो सफेद) धारण करें। पूजा स्थान पर शिव परिवार की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें।

  3. शिव अभिषेक: सर्वप्रथम जल से अभिषेक करें, फिर पंचामृत अर्पित करें और पुनः शुद्ध जल चढ़ाएं।

  4. श्रृंगार एवं अर्पण: शिवलिंग पर चंदन और भस्म लगाएं। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र और फूल प्रेमपूर्वक अर्पित करें।

  5. आरती व कथा: घी का दीपक जलाकर प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में कपूर से आरती कर क्षमा प्रार्थना करें।

क्यों खास है गुरु प्रदोष व्रत?

गुरु प्रदोष व्रत का महत्व अन्य प्रदोषों की तुलना में अधिक माना जाता है क्योंकि यह ज्ञान और सौभाग्य के कारक गुरु ग्रह से जुड़ा है। इस व्रत को करने से न केवल शत्रुओं का नाश होता है, बल्कि शिक्षा, करियर और वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं। इससे घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

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