बैंकॉक: थाईलैंड के दक्षिणी प्रांत से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी मानवता को शर्मसार और झकझोर कर रख दिया है। एक सिरफिरे पूर्व पुलिस अधिकारी ने डे-केयर सेंटर (Day-care Center) को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें 22 मासूम बच्चों सहित कम से कम 34 लोगों की जान चली गई। खून से सनी इस वारदात के बाद थाईलैंड में कोहराम मच गया है। अभी इस घटना का दर्द कम भी नहीं हुआ था कि हाट याई क्षेत्र के एक स्कूल में भी गोलीबारी और बंधक बनाने की घटना से हड़कंप मच गया।
डे-केयर सेंटर बना श्मशान: पूर्व पुलिसकर्मी का खौफनाक तांडव
प्रारंभिक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावर पहले पुलिस बल में कार्यरत था। वह दक्षिणी थाईलैंड के एक डे-केयर सेंटर में हथियार लेकर दाखिल हुआ। बताया जा रहा है कि उसने पहले वहां मौजूद बच्चों और शिक्षकों को बंधक बनाया और फिर बेदर्दी से उन पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस हमले में मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या उन मासूमों की है जो वहां खेलने और सीखने आए थे। घटना के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। हालांकि, स्थानीय प्रशासन अभी भी आधिकारिक रूप से अंतिम आंकड़ों की पुष्टि करने में जुटा है।
हाट याई के स्कूल में भी फायरिंग, 18 साल के युवक ने मचाया उत्पात
एक तरफ डे-केयर सेंटर में मातम पसरा था, वहीं दूसरी ओर सोंगखला प्रांत के हाट याई क्षेत्र से भी हिंसा की खबर आ गई। यहां एक 18 वर्षीय युवक ने एक स्कूल परिसर में घुसकर गोलीबारी की। इस घटना में दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों ने पूरे स्कूल को चारों ओर से घेर लिया और एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया। हमलावर ने कुछ देर के लिए छात्रों और शिक्षकों को बंधक भी बनाया, जिससे स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, जांच में जुटी एजेंसियां
इन दोहरे हमलों ने थाईलैंड की आंतरिक सुरक्षा और खासकर शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि हमलावरों के पास अत्याधुनिक हथियार कहां से आए। साथ ही, जांच एजेंसियां इस पहलू पर भी गौर कर रही हैं कि क्या इन दोनों घटनाओं के पीछे कोई साझा साजिश है या ये अलग-अलग वारदातें हैं। पूरे देश में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है।
शोक में डूबा थाईलैंड, सरकार की कड़ी कार्रवाई की तैयारी
इन दर्दनाक घटनाओं के बाद थाईलैंड सरकार पर कड़े कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। मासूम बच्चों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी स्तब्ध कर दिया है। प्रधानमंत्री और शीर्ष अधिकारियों ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है और जल्द ही आधिकारिक बयान जारी करने की बात कही है। देशवासियों में इस कायरतापूर्ण हमले को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। चाहेंगे?
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