Sunday , 24 May 2026

दिल्ली की भयंकर गर्मी में पसीने-पसीने हुए US सेक्रेटरी मार्को रूबियो, फिर जो कहा… सुनकर हंस पड़े सभी!

नई दिल्ली। भारत की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आए अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रूबियो को शनिवार को देश की राजधानी दिल्ली की ‘अग्निपरीक्षा’ से गुजरना पड़ा। दिल्ली में पारा जैसे ही 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा, अमेरिकी मेहमान इस चिलचिलाती गर्मी से बेहाल नजर आए। हालांकि, इस तपती धूप में भी उनका मजाकिया अंदाज कम नहीं हुआ। उन्होंने दिल्ली की भयंकर गर्मी पर ऐसा तंज कसा कि वहां मौजूद सभी लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

चिलचिलाती धूप में रखा अपना वादा, छोटा कर दिया भाषण

यह दिलचस्प वाकया उस समय का है जब मार्को रूबियो दिल्ली में नए ‘US दूतावास सपोर्ट एनेक्स भवन’ का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस खास मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडियाकर्मियों, दिग्गज राजनयिकों और कॉर्पोरेट जगत के लीडर्स की भारी भीड़ जमा थी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रूबियो ने मुस्कुराते हुए कहा, “आज इस बेहद खास मौके पर आप सभी के बीच होना वास्तव में मेरे लिए एक बड़ा सम्मान है।”

‘मैं मियामी से हूं, लेकिन दिल्ली की गर्मी तो…’

बढ़ते तापमान और पसीने से तर-बतर माहौल का जिक्र करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने चुटकी ली। उन्होंने कहा, “मैं अपनी बात को बहुत संक्षेप में यानी छोटा रखना चाहता हूं क्योंकि यहां वाकई बहुत गर्मी है… बहुत ही ज्यादा गर्मी है! हालांकि, अच्छी बात यह है कि यहां उमस (humidity) नहीं है। मैं खुद मियामी से आता हूं, जहां उमस वाली चिपचिपी गर्मी होती है। लेकिन दिल्ली की इस सूखी धूप को देखकर मुझे लग रहा है कि… अरे, अभी समय क्या हुआ है? अब तक तो मौसम को थोड़ा ठंडा हो जाना चाहिए था!”

रूबियो ने आगे हंसते हुए कहा, “इसीलिए मैं इस कड़कती धूप में आपको यहां जरूरत से ज्यादा देर तक रोककर परेशान नहीं करना चाहता।” उनकी इस हाजिरजवाबी और देसी अंदाज को देखकर पंडाल में ठहाके गूंज उठे।

जब 100 साल बाद भारत आएंगे रूबियो के परपोते

इस भव्य उद्घाटन समारोह के दौरान मई 2026 की तारीख वाली एक खूबसूरत पट्टिका (शिलालेख) का अनावरण भी किया गया। इस ऐतिहासिक पट्टिका पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सेक्रेटरी मार्को रूबियो के नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित थे।

अपनी नाम वाली इस पट्टिका को देखकर रूबियो बेहद भावुक और खुश नजर आए। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “यह मेरे जीवन की पहली आधिकारिक पट्टिका है। आज से ठीक सौ साल बाद, जब मेरे परपोते-परपोतियां भारत की सैर पर आएंगे, तो वे इस ऐतिहासिक इमारत में आकर मेरा नाम देखेंगे। यह सोचकर ही मुझे बहुत शानदार महसूस हो रहा है। मुझे यह देखकर बेहद खुशी हुई, आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।”

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