नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। मई के बाद यह पहला मौका है जब वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल के दामों में इतनी बड़ी तेजी दर्ज की गई है। इस बीच भारतीय तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने 25 जुलाई 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल की नई दरें जारी कर दी हैं।
देशवासियों के लिए राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मची उथल-पुथल के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कंपनियां पिछले कई दिनों की तरह आज भी पुरानी दरों पर ही ईंधन बेच रही हैं।
ईरान तनाव के कारण कच्चा तेल $100 के पार
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस अचानक तेजी की मुख्य वजह ईरान से बढ़ा तनाव और मध्य पूर्व (Middle East) में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गहराती चिंता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं या समुद्री व्यापारिक मार्गों (जैसे होर्मुज स्ट्रेट) पर कोई बाधा आती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बुरा असर पड़ सकता है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि मौजूदा कीमत अप्रैल के अंत में पहुंचे 120 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर से अभी भी नीचे है। भारत में 25 मई के बाद से ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं, जब कंपनियों ने पेट्रोल पर ₹2.61 और डीजल पर ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।
प्रमुख शहरों में आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
देश के चारों महानगरों समेत प्रमुख शहरों में आज ईंधन की दरें स्थिर बनी हुई हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर बिक रहा है।
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
| दिल्ली | ₹102.12 | ₹95.20 |
| मुंबई | ₹111.21 | ₹97.83 |
| कोलकाता | ₹113.51 | ₹99.82 |
| बेंगलुरु | ₹110.89 | ₹98.80 |
| चेन्नई | ₹108.01 | ₹99.66 |
| गुरुग्राम | ₹102.77 | ₹95.44 |
| नोएडा | ₹101.92 | ₹95.37 |
नोट: हैदराबाद में डीजल की कीमत ₹103.82 प्रति लीटर के स्तर पर बनी हुई है, जो अन्य बड़े शहरों की तुलना में अधिक है।
भारत में कैसे तय होते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
भारत में ईंधन की खुदरा दरें मुख्यतः निम्नलिखित चार कारकों पर निर्भर करती हैं:
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अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमत: कच्चा तेल महंगा होने पर भारत में भी रिफाइनिंग और खरीद लागत बढ़ जाती है।
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रुपया बनाम डॉलर (Exchange Rate): चूंकि भारत 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और इसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने पर आयात महंगा हो जाता है।
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टैक्स संरचना (Central & State Taxes): केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों का वैट (VAT) मिलकर ईंधन के अंतिम मूल्य का बड़ा हिस्सा तय करते हैं।
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माल भाड़ा व डीलर कमीशन: रिफाइनरी से पेट्रोल पंपों तक तेल पहुंचाने का खर्च और डीलर का मार्जिन भी अंतिम कीमत में जुड़ता है।
अलग-अलग राज्यों में स्थानीय वैट (VAT) की दरें भिन्न होने के कारण ही देश भर के राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दामों में अंतर देखने को मिलता है।
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