चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद आक्रामक चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव की तर्ज पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के सबसे मजबूत पारंपरिक गढ़ों में सीधी सेंधमारी करने की तैयारी कर रही है। सूबे के सियासी मैदान में खुद को एक मजबूत, सक्षम और व्यावहारिक विकल्प के तौर पर पेश करने के लिए पार्टी ने जमीन पर रणनीति लागू करनी भी शुरू कर दी है।
जिस तरह पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व वाले क्षेत्रों—भवानीपुर, नंदीग्राम, दक्षिण बंगाल और कोलकाता में पूरी संगठनात्मक ताकत झोंक दी थी, ठीक उसी आक्रामक मॉडल को अब पंजाब के सियासी अखाड़े में आजमाया जा रहा है।
53 विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस, मजबूत नेताओं पर नजर
पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने उन 53 सीटों को खास तौर पर चिह्नित किया है, जो लंबे समय से आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के अभेद्य दुर्ग माने जाते रहे हैं। पार्टी की रणनीति इन क्षेत्रों में सीधा मुकाबला खड़ा करने की है।
बीजेपी रणनीतिकारों का मानना है कि पंजाब में पार्टी की जीत की संभावना इस बात पर निर्भर करेगी कि वह मतदाताओं के बीच सरकार बनाने वाले एक विश्वसनीय विकल्प की छवि कितनी मजबूती से स्थापित कर पाती है। इसके लिए आप और कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाकों में ऐसे जनाधार वाले चेहरों की पहचान की जा रही है, जो चुनाव जीतने की क्षमता रखते हैं। पार्टी चुनाव से पहले ऐसे प्रभावशाली नेताओं को अपने पाले में लाने की मुहिम पर भी तेजी से काम कर रही है, ताकि स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूती मिल सके।
AAP और कांग्रेस के गढ़ों में BJP की दस्तक
पंजाब के भौगोलिक और सियासी समीकरणों पर नजर डालें तो मालवा, माझा और दोआबा की करीब 30-32 सीटों पर आम आदमी पार्टी की मजबूत पकड़ मानी जाती है। वहीं, कांग्रेस का प्रभाव शहरी व अर्ध-शहरी इलाकों के अलावा माझा और दोआबा के कुछ हिस्सों की लगभग 35-40 सीटों पर बना हुआ है।
बीजेपी के इस नए चुनावी रोडमैप की बुनियाद 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर टिकी है। उस चुनाव में कांग्रेस ने राज्य की 13 में से 7 सीटें जीती थीं, जबकि आम आदमी पार्टी के खाते में 3 सीटें आई थीं। शिरोमणि अकाली दल को एक सीट मिली थी और दो सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते थे।
हालांकि, जब इन नतीजों का विधानसभा क्षेत्रवार विश्लेषण किया गया, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। कांग्रेस 37 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही, जबकि आम आदमी पार्टी 33 सीटों पर आगे थी। वहीं, बीजेपी ने 23 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल कर सबको चौंका दिया और शिरोमणि अकाली दल सिर्फ 9 सीटों पर आगे रहा। बीजेपी इन आंकड़ों को पंजाब में अपने राजनीतिक विस्तार के बड़े मौके के तौर पर देख रही है। पार्टी का आकलन है कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के खिलाफ पनप रहे सत्ता विरोधी रुझान (एंटी-इनकंबेंसी) का सीधा सियासी फायदा उठाया जा सकता है।
‘3C’ फॉर्मूले से सत्ता पक्ष की घेराबंदी, नशा विरोधी यात्रा से माहौल बनाने की तैयारी
2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 92 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया था और उसका वोट शेयर करीब 42 प्रतिशत रहा था, जबकि कांग्रेस 18 सीटों और 23 प्रतिशत वोट शेयर पर सिमट गई थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में समीकरण काफी बदल गए। आम आदमी पार्टी का वोट शेयर गिरकर लगभग 26 प्रतिशत पर आ गया, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर मामूली बढ़त के साथ 26.3 प्रतिशत दर्ज किया गया।
लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने 23 विधानसभा क्षेत्रों में नंबर-1 रहते हुए बढ़त बनाई थी, जबकि 6 सीटों पर दूसरे और 16 सीटों पर तीसरे स्थान पर रही। इस तरह पार्टी ने 45 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी सीधी मौजूदगी दर्ज कराई। इसके उलट, शिरोमणि अकाली दल 9 क्षेत्रों में आगे रहा और 5-5 सीटों पर दूसरे व तीसरे स्थान पर रहा।
आम आदमी पार्टी को चौतरफा घेरने के लिए बीजेपी ने ‘3C’—यानी क्राइम (Crime), करप्शन (Corruption) और चिट्टा (Chitta यानी नशा) का आक्रामक मुद्दा तैयार किया है। पंजाब में नशे की समस्या को लेकर पार्टी व्यापक नशा विरोधी जन-जागरण यात्रा निकाल रही है, जिसका समापन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में होना तय है। इसके साथ ही केंद्र सरकार के विकास कार्यों और उपलब्धियों को घर-घर पहुंचाकर बीजेपी मतदाताओं का भरोसा जीतने की पुरजोर कोशिश में जुटी है।
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