पश्चिम चंपारण: नेपाल के तराई इलाकों में जारी भीषण बारिश का तांडव अब बिहार के सीमावर्ती जिले पश्चिम चंपारण में साफ तौर पर दिखने लगा है। गंडक (नारायणी) नदी में उफान के बाद वाल्मीकिनगर गंडक बराज से रिकॉर्ड मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण तटवर्ती और निचले इलाकों में जलप्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। चालू मानसून सत्र में पहली बार बराज से 5.43 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया, जिससे गंडक के किनारे बसे दर्जनों गांवों और शहरी इलाकों में बाढ़ का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
NH-727 बेतिया-गोरखपुर हाईवे पर चढ़ा 2 फीट पानी, आवागमन पर मंडराया संकट
नदी का उफनता पानी अब राष्ट्रीय राजमार्ग NH-727 (बेतिया-गोरखपुर इंटर-स्टेट मुख्य मार्ग) तक पहुंच चुका है। हाईवे पर लगभग दो फीट पानी की तेज चादर चलने के कारण दोनों राज्यों के बीच वाहनों की आवाजाही बेहद जोखिम भरी हो गई है। भारी और हल्के वाहन पानी के तेज बहाव के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। सड़क पर पानी के बढ़ते दबाव को देखते हुए इस प्रमुख लाइफलाइन मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित होने का अंदेशा गहरा गया है।
बेतिया शहर के एक दर्जन मोहल्ले जलमग्न, एसपी ऑफिस और पुलिस लाइन में घुसा पानी
बाढ़ की विनाशलीला केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि बेतिया नगर निगम और आसपास के इलाकों में भी पानी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। शहर के लगभग एक दर्जन मोहल्लों में स्थिति बदतर हो गई है। मंगलपुर, मलकौली, कैलाशनगर, गोड़ियापट्टी, मिर्जा टोला, पुअर हाउस और चखनी सहित कई घनी बस्तियों में घरों के भीतर पानी जमा हो गया है।
बाढ़ का असर प्रशासनिक और सरकारी दफ्तरों पर भी पड़ा है। पश्चिम चंपारण के एसपी कार्यालय परिसर, पुलिस लाइन, बीआरसी भवन तथा कई सरकारी विद्यालयों में जलभराव हो गया है। इससे पुलिस और प्रशासनिक कामकाज के साथ-साथ आम जनता की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो गई है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के जंगलों में सैलाब, वन्यजीवों में मची भगदड़
गंडक के उफान की जद में प्रसिद्ध वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) का वन क्षेत्र भी आ गया है। जंगल के निचले हिस्सों में पानी भर जाने से बाघ, हिरण, गैंडे समेत तमाम वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पानी से बचने के लिए वन्यजीव ऊंचे टीलों और सड़कों की तरफ रुख कर रहे हैं, जिससे अफरा-तफरी का माहौल है। वन विभाग और जिला प्रशासन की विशेष टीमें जंगल और बफर जोन में निरंतर गश्त कर हालात की निगरानी कर रही हैं।
नेपाल के देवघाट से भारी डिस्चार्ज के बाद लाल निशान पार, बगहा एसडीएम ने संभाला मोर्चा
नेपाल स्थित देवघाट से लगभग 6.74 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नारायणी गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। इसके चलते दियारा और तटबंध के निचले इलाकों में बसी हजारों की आबादी अचानक घिर गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बगहा की एसडीएम चांदनी कुमारी ने अधिकारियों के दल के साथ प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की। संवेदनशील तटबंधों और कटाव वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
गंडक के डिस्चार्ज में गिरावट, शाम तक सुधार की उम्मीद
इस विकट स्थिति के बीच राहत भरी खबर यह है कि गंडक बराज से डिस्चार्ज में अब कमी आने लगी है। सुबह जो जलस्तर 5.43 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था, वह दोपहर बाद घटकर लगभग 4.28 लाख क्यूसेक पर आ गया है। पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरणजोत सिंह ने बताया कि जलस्तर के घटने से शाम तक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार होने की संभावना है।
हालांकि, पिछले 24 घंटों में ग्रामीण और शहरी इलाकों में जमा हुआ पानी स्थानीय लोगों के लिए भारी मुसीबत बना हुआ है। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल नावों की व्यवस्था, राहत सामग्री और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम करने की गुहार लगाई है। प्रशासन की आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
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