Saturday , 16 May 2026

आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा और लापरवाही पर सीएम योगी का बड़ा एक्शन : यूपी के 200 अस्पतालों पर गिरी गाज, 100 का भुगतान रोका तो 100 किए गए सस्पेंड

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार बड़े और कड़े फैसले ले रही है। इसी कड़ी में ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ में निर्धारित मानकों की अनदेखी करने और लापरवाही बरतने वाले निजी अस्पतालों पर सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बाद, राज्य के करीब 200 प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए गए हैं। सीएम योगी ने दोटूक निर्देश दिए हैं कि गरीबों और जरूरतमंदों के इलाज में किसी भी स्तर पर धांधली या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सरकार की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से प्रदेश भर के डिफाल्टर अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है। मानकों को पूरा न करने वाले 100 अस्पतालों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है, जबकि 100 अन्य अस्पतालों को योजना के पैनल से ही सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है।

नई व्यवस्था में 35 कड़े मानक अनिवार्य, अब ‘लूपहोल’ की गुंजाइश खत्म

स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आयुष्मान भारत योजना देश के आर्थिक रूप से कमजोर, वंचित और गरीब वर्गों को मुफ्त और विश्वस्तरीय इलाज देने की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है। मुख्यमंत्री के आदेश पर इस पूरी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए अस्पतालों की सूचीबद्धता (इम्पैनलमेंट) और उनके क्वॉलिटी टेस्ट की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा कड़ा कर दिया गया है।

अब सरकार की ओर से ‘अस्पताल इम्पैनलमेंट मॉड्यूल’ (HEM 2.0) पोर्टल के जरिए सभी सूचीबद्ध अस्पतालों का भौतिक और डिजिटल सत्यापन किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत अब हर अस्पताल को 35 सबसे महत्वपूर्ण मानकों की कसौटी पर खरा उतरना अनिवार्य होगा। इन कड़े मानकों में मुख्य रूप से:

  • अस्पताल का वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र (Registration Certificate)

  • फायर सेफ्टी एनओसी (Fire Safety NOC)

  • मरीजों के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक चिकित्सा उपकरण

  • तैनात चिकित्सकों की असली शैक्षणिक योग्यता और डिग्रियां

  • हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री (HFR) पंजीकरण और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

बार-बार दी गई चेतावनी, फिर भी 46 जिलों के 200 अस्पतालों ने दिखाई ढिलाई

सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) और स्टेट हेल्थ एजेंसी की टीमों ने हर स्तर पर अस्पतालों की मदद की। इसके लिए लगातार ई-मेल, फोन कॉल, मैसेज, पत्राचार और यहां तक कि वर्चुअल बैठकें आयोजित कर उन्हें गाइड किया गया। इसका फायदा यह हुआ कि सूबे के 95 प्रतिशत से अधिक अस्पतालों ने समझदारी दिखाते हुए समय पर खुद को नए ‘एचईएम 2.0 पोर्टल’ पर माइग्रेट (अपग्रेड) कर लिया।

हालांकि, लगभग 200 निजी अस्पतालों ने सरकार की ओर से बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद तय समय सीमा के भीतर इस जरूरी प्रक्रिया को पूरा नहीं किया और मानकों की अनदेखी की। नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले ये अस्पताल यूपी के लगभग 46 प्रमुख जिलों से हैं, जिनमें मुख्य रूप से लखनऊ, कानपुर नगर, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ, बरेली, झांसी, मुरादाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मथुरा, मऊ, जौनपुर, देवरिया, गोंडा, हरदोई, बाराबंकी, बिजनौर, बुलंदशहर और सोनभद्र समेत कई अन्य जिले शामिल हैं।

100 अस्पताल सस्पेंड और 100 का पेमेंट होल्ड, एनएबीएच (NABH) भी हुआ जरूरी

समीक्षा बैठक के बाद सीएम योगी के कड़े रुख को देखते हुए विभाग ने तुरंत एक्शन लिया। लापरवाही बरतने वाले पहले ग्रुप के 100 अस्पतालों का सरकारी भुगतान (पेमेंट) होल्ड पर डाल दिया गया है, वहीं गंभीर अनियमितता और सुस्ती दिखाने वाले दूसरे ग्रुप के 100 अस्पतालों को आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर का रास्ता दिखाते हुए सस्पेंड कर दिया गया है।

इतना ही नहीं, योगी सरकार ने अब योजना से जुड़े सभी अस्पतालों को राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणन यानी ‘एनएबीएच’ (NABH Accreditation) हासिल करने के सख्त निर्देश दिए हैं। फर्जीवाड़े और धांधली को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य और जिला स्तर की स्पेशल टीमों द्वारा अस्पतालों का औचक निरीक्षण (सरप्राइज ऑडिट) और लाइव मॉनिटरिंग कराई जा रही है।

डॉक्टरों की फर्जी डिग्री लगाने वालों की अब खैर नहीं, आ गया डिजिटल सिस्टम

स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए योगी सरकार अब तकनीक के इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा जोर दे रही है। इसके तहत सभी अस्पतालों को ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ (ABDM) के अंतर्गत सक्षम एचएमआईएस (HMIS) प्रणाली लागू करने को कहा गया है, जिससे मरीजों के दाखिले से लेकर डिस्चार्ज तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और ऑनलाइन होगी।

इसके साथ ही, चरणबद्ध तरीके से ‘इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड’ (EHR) व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे मरीजों का पूरा मेडिकल इतिहास डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा और डॉक्टरों को भी इलाज में आसानी होगी। साचीज की सीईओ ने यह भी साफ किया कि राज्य स्तर पर पोर्टल संचालन के लिए अस्पतालों को लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है। लेकिन, जिन अस्पतालों के खिलाफ डॉक्टरों की फर्जी डिग्रियां लगाने या उनके विवरण का गलत इस्तेमाल करने की शिकायतें मिल रही हैं, उनके खिलाफ सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

Check Also

NEET-UG 2026 पेपर लीक में CBI का सबसे बड़ा एक्शन: पुणे का केमिस्ट्री लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी गिरफ्तार, यही था महाघोटाले का ‘किंगपिन’

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘NEET-UG 2026’ के पेपर …