नई दिल्ली। भारतीय इतिहास के महानतम कूटनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और नीतिशास्त्री आचार्य चाणक्य ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘चाणक्य नीति’ में मानव जीवन के हर पहलू को गहराई से समझाया है। सदियों पहले लिखे गए उनके सिद्धांत आज के आधुनिक युग में भी उतने ही सटीक और प्रासंगिक बैठते हैं। विशेष रूप से वैवाहिक जीवन और स्त्री-पुरुष संबंधों को लेकर चाणक्य के विचार अत्यंत गूढ़ हैं। चाणक्य का मानना था कि एक पुरुष की सफलता और उसके घर की खुशहाली काफी हद तक उसके जीवनसाथी के गुणों पर निर्भर करती है। उन्होंने कुछ ऐसे विशेष गुणों का वर्णन किया है, जो यदि किसी स्त्री में हों, तो वह दरिद्रता को भी वैभव में बदल देती है।
धर्मपरायण और कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान: कुल का करती हैं उद्धार
आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो स्त्री धर्म के मार्ग पर चलती है और जिसके संस्कार उच्च होते हैं, वह न केवल अपने पति बल्कि पूरे कुल का उद्धार करती है। यहाँ धर्मपरायण होने का अर्थ केवल पूजा-पाठ से नहीं, बल्कि अपने नैतिक कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान होने से है। ऐसी स्त्री घर में अनुशासन, मर्यादा और सात्विक वातावरण बनाए रखती है, जिससे परिवार में सदैव सुख-शांति का वास होता है। ऐसी जीवनसंगिनी जिस पुरुष को मिलती है, उसका जीवन तनावमुक्त और व्यवस्थित हो जाता है।
मधुर वाणी और संतोष का गुण: संकट में बनती हैं ढाल
चाणक्य नीति कहती है कि वाणी में मधुरता किसी भी स्त्री का सबसे बड़ा आभूषण है। जिस स्त्री के वचन मीठे होते हैं, वह कठिन से कठिन समय में भी परिवार को बिखरने नहीं देती। कड़वे वचन बोलने वाली स्त्री जहाँ संपन्न घर में भी कलह का कारण बनती है, वहीं मधुरभाषी स्त्री पराए को भी अपना बना लेती है। इसके साथ ही, जो स्त्री विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखती है और अधिक की लालसा के बजाय संतोष करना जानती है, वह पुरुष के जीवन को संघर्षों के बीच भी सुकून से भर देती है।
बचत करने में निपुण और कुशल गृहणी: घर में नहीं आती दरिद्रता
चाणक्य के अनुसार, जिस पुरुष की पत्नी धन के संचय (बचत) में निपुण होती है, उस घर में कभी दरिद्रता पैर नहीं पसारती। साक्षात लक्ष्मी का रूप मानी जाने वाली ऐसी स्त्री घर के बजट को इतनी कुशलता से संतुलित रखती है कि आय कम होने पर भी परिवार को अभाव महसूस नहीं होता। संकट के समय जब पुरुष खुद को असहाय महसूस करता है, तब स्त्री द्वारा सूझबूझ से बचाकर रखा गया धन ही परिवार की नैया पार लगाता है। ऐसी पत्नी पुरुष के लिए आर्थिक सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी होती है।
शिक्षित और बुद्धिमानी: सबसे श्रेष्ठ मार्गदर्शक और सलाहकार
एक समझदार और बुद्धिमान पत्नी पुरुष के लिए दुनिया की सबसे बड़ी सलाहकार और मित्र होती है। चाणक्य का मानना था कि शिक्षित और दुनियादारी की समझ रखने वाली स्त्री अपने पति को सही और गलत के बीच का अंतर समझाकर बड़े संकटों से बचा सकती है। ऐसी स्त्रियां न केवल घर का प्रबंधन बेहतर करती हैं, बल्कि अपनी संतानों को भी श्रेष्ठ संस्कार देती हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियां संवर जाती हैं। जिस प्रकार एक रथ को चलाने के लिए दोनों पहियों का सही होना आवश्यक है, उसी प्रकार सफल जीवन के लिए एक गुणी और संस्कारी पत्नी का साथ मिलना अनिवार्य है।
voice of india
