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बजट 2026: दिल थामकर बैठिए! निर्मला सीतारमण के पिटारे से नौकरीपेशा वर्ग को मिल सकती हैं ये 5 बड़ी सौगातें

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नई दिल्ली: रविवार, 1 फरवरी को देश की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी होंगी, जो अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी. बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों से जूझ रहे आम आदमी, विशेषकर वेतनभोगी वर्ग को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं. सूत्रों की मानें तो सरकार इस बार मध्य वर्ग को राहत देने के मूड में है और कई बड़ी घोषणाएं कर सकती है. आइए जानते हैं कि इस बार के बजट में नौकरीपेशा लोगों के लिए क्या ख़ास हो सकता है.

टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद

लंबे समय से टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार नए टैक्स रिजीम के साथ-साथ पुराने टैक्स रिजीम में भी बदलाव कर सकती है. चर्चा है कि 24 लाख रुपये से अधिक की आय पर लगने वाले 30 प्रतिशत के टैक्स स्लैब की सीमा को बढ़ाकर 30 लाख रुपये किया जा सकता है.[1][2] अगर ऐसा होता है तो यह उच्च आय वर्ग के लिए एक बड़ी राहत होगी.

नए टैक्स रिजीम में और कटौतियों की मांग

नई टैक्स व्यवस्था को और आकर्षक बनाने के लिए इसमें एनपीएस, स्वास्थ्य बीमा (धारा 80डी), और होम लोन के ब्याज जैसी महत्वपूर्ण कटौतियों को शामिल करने की मांग जोर पकड़ रही है.[1][3] यदि सरकार यह मांग मान लेती है तो बड़ी संख्या में करदाता नई टैक्स व्यवस्था को अपना सकते हैं, जिससे उन्हें टैक्स बचाने में और मदद मिलेगी.

स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा में बढ़ोतरी

नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन टैक्स बचाने का एक महत्वपूर्ण जरिया है. फिलहाल इसकी सीमा 75,000 रुपये है, जिसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये या उससे अधिक करने की मांग की जा रही है.[1][2] इससे वेतनभोगी कर्मचारियों के हाथ में अधिक पैसा आएगा.

सेक्शन 80C और 80D की सीमा में वृद्धि

सेक्शन 80C के तहत पीपीएफ, ईएलएसएस, और एलआईसी जैसी योजनाओं में निवेश पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है. इस सीमा को बढ़ाकर 2 लाख रुपये या उससे ज़्यादा करने की उम्मीद है.[1] इसके साथ ही, स्वास्थ्य बीमा पर मिलने वाली 80डी की छूट की सीमा में भी बढ़ोतरी की जा सकती है, जिससे लोग अधिक बचत और निवेश कर सकेंगे.

टीडीएस प्रणाली का सरलीकरण

मौजूदा टीडीएस प्रणाली काफी जटिल है और अलग-अलग तरह के लेनदेन पर अलग-अलग दरें लागू होती हैं. बजट 2026 में टीडीएस व्यवस्था को सरल और सुगम बनाने की उम्मीद की जा रही है, ताकि करदाताओं को अनुपालन में आसानी हो.


 

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