पश्चिम बंगाल में हुए चर्चित और हाई-प्रोफाइल चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच में उत्तर प्रदेश (यूपी) कनेक्शन लगातार गहराता जा रहा है। मामले की तफ्तीश कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार तड़के एक और बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए यूपी के बलिया के रहने वाले राजकुमार सिंह को मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार कर लिया है। गौरतलब है कि इसी हत्याकांड में कुछ दिन पहले बलिया के ही एक अन्य शातिर राज सिंह को अयोध्या से दबोचा गया था। एक के बाद एक यूपी के दो युवकों की गिरफ्तारी से इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस की साजिश और आरोपियों के अंतरराज्यीय नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
हरिद्वार से लौटते समय छपार टोल प्लाजा पर सीबीआई ने बिछाया जाल
सीबीआई सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी को इनपुट मिला था कि मुख्य संदिग्धों में से एक राजकुमार सिंह उत्तराखंड के हरिद्वार से वापस लौट रहा है। इस पुख्ता सूचना के आधार पर सीबीआई की एक विशेष टीम ने मुजफ्फरनगर के छपार टोल प्लाजा के पास तड़के ही घेराबंदी कर ली थी। जैसे ही संदिग्ध की गाड़ी टोल प्लाजा के पास पहुंची, पहले से मुस्तैद सीबीआई अधिकारियों ने उसे चारों तरफ से घेरकर हिरासत में ले लिया। शुरुआती पूछताछ के बाद उसे आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया।
चुनाव नतीजों के ठीक दो दिन बाद 6 मई को कार रोककर की गई थी ताबड़तोड़ फायरिंग
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के ठीक दो दिन बाद यानी 6 मई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) 42 वर्षीय चंद्रनाथ रथ की बेहद सनसनीखेज तरीके से हत्या कर दी गई थी। घात लगाए बैठे अज्ञात बदमाशों ने पहले उनकी कार को रुकवाया और फिर उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग झोंक दी थी। इस खूनी हमले में चंद्रनाथ रथ के सीने और पेट में तीन गोलियां लगी थीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। राज्य की कानून व्यवस्था से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच तुरंत सीबीआई को सौंप दी गई थी।
कोर्ट से मिली 24 घंटे की रिमांड, अयोध्या कनेक्शन खंगाल रही जांच एजेंसी
मुजफ्फरनगर से गिरफ्तारी के बाद सीबीआई टीम ने आरोपी राजकुमार सिंह को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत में पेश किया। जांच एजेंसी की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी की 24 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर ली है। सीबीआई अब राजकुमार को अपने साथ ले जाकर इस पूरी हत्या की साजिश, मर्डर के लिए हुई फंडिंग (पैसों का लेन-देन) और इस नेटवर्क में शामिल अन्य सफेदपोशों के बारे में कड़ी पूछताछ कर रही है। इसके साथ ही एजेंसी यह कड़ियां जोड़ने में जुटी है कि अयोध्या से पकड़े गए राज सिंह और मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार राजकुमार के बीच क्या संबंध है और इन्हें सुपारी किसने दी थी।
मुंबई में क्रेन हेल्पर था राजकुमार, वारदात के बाद विदेश भागने की फिराक में था
जांच के दौरान राजकुमार के पारिवारिक और आपराधिक बैकग्राउंड की भी कई बातें सामने आई हैं। वह मूल रूप से बलिया का रहने वाला है और उसके पिता त्रिभुवन नारायण सिंह निजी कंपनी एलएंडटी (L&T) में काम करते थे, जो हाल ही में रिटायर हुए हैं। राजकुमार ने केवल बीए प्रथम वर्ष तक ही पढ़ाई की थी, जिसके बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और मुंबई चला गया। मुंबई में वह काफी समय तक क्रेन हेल्पर के रूप में काम कर रहा था। लेकिन करीब आठ महीने पहले वह अचानक मुंबई से वापस अपने गांव लौट आया था और इन दिनों पासपोर्ट बनवाकर विदेश जाने की फिराक में था।
सिविल ड्रेस में आई थी टीम, पिता का दावा- हमारा बंगाल से कोई लेना-देना नहीं
दूसरी तरफ, राजकुमार के पिता त्रिभुवन नारायण सिंह ने अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए दावा किया है कि उनके परिवार का पश्चिम बंगाल से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। पिता ने बताया कि सीबीआई के अधिकारियों ने फोन कर उन्हें बेटे को हिरासत में लिए जाने की सूचना दी है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि गिरफ्तारी से एक दिन पहले कुछ अज्ञात लोग सिविल ड्रेस (सादे कपड़ों) में उनके बलिया स्थित घर आए थे और राजकुमार के बारे में पूछताछ करते हुए उसकी तस्वीर और मोबाइल नंबर लेकर गए थे। फिलहाल इस बड़ी कार्रवाई के बाद से आरोपी का परिवार गहरे सदमे और हैरानी में है।
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