Monday , 3 August 2026

CJP प्रदर्शन हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गंभीर अपराधियों को नहीं मिलेगी राहत, राज्यों को केस वापस लेने की छूट, 19 अगस्त को अगली सुनवाई

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने एक बड़ा और अहम आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने अपने 28 जुलाई के पिछले आदेश में संशोधन करते हुए साफ किया है कि हत्या, दुष्कर्म और पोक्सो (POCSO) जैसे संगीन और जघन्य अपराधों में शामिल लोगों को कोई राहत नहीं दी जाएगी। हालांकि, राज्यों को छोटे-मोटे मामलों या राजनीतिक कारणों से प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज केसों को बंद करने या वापस लेने की पूरी छूट रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।

राज्यों को FIR वापस लेने की आजादी, SG बोले- वचनों पर कायम है केंद्र

चीफ जस्टिस (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि ‘आपराधिक इतिहास’ शब्द का तात्पर्य केवल जघन्य अपराधों से है। पीठ ने कहा कि दिल्ली और कोई भी अन्य राज्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामूली प्राथमिकियों (FIR) को बंद करने या वापस लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर अपने पहले दिए गए वचनों पर पूरी तरह कायम है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि रेप, मर्डर और पॉक्सो जैसे आपराधिक बैकग्राउंड वाले 2,700 से ज्यादा लोगों पर दर्ज केस वापस नहीं लिए जाएंगे।

पैलेट गन, लाठीचार्ज और सादे कपड़ों में पुलिस पर तीखी बहस

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कोर्ट में दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए:

  • सादे कपड़ों में पुलिस और गुंडों की भूमिका: अधिवक्ता गोपाल ने कोर्ट को बताया कि ऐसे पुलिसकर्मियों और संदिग्धों को चिन्हित किया गया है जो बिना वर्दी के थे या हिंसा में शामिल थे। उन्होंने सवाल उठाया कि RAF को कार्रवाई का निर्देश किसने दिया और पैलेट गन व लाठीचार्ज की इजाजत किसने दी?

  • पैलेट गन का इस्तेमाल: वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के बाद पहली बार दिल्ली में पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल को अपने हलफनामे में पैलेट गन के इस्तेमाल पर स्थिति पूरी तरह साफ करने के निर्देश दिए हैं।

‘आधार’ और फेशियल रिकॉग्निशन से निजता का हनन?

सुनवाई के दौरान वकील हरिहरन और गोपाल ने विरोध स्थल पर बड़े पैमाने पर किए गए फेशियल सर्विलांस (Facial Surveillance) और तकनीकी निगरानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सहमति के लोगों का चेहरा स्कैन किया गया और ‘आधार’ (Aadhaar) डेटा का इस्तेमाल किया गया, जो निजता के अधिकार (Right to Privacy) का सीधे तौर पर उल्लंघन है। वकीलों ने सवाल उठाया कि इस तरह जुटाए गए डेटा को पुलिस कब तक अपने पास सुरक्षित रखेगी?

SIT जांच पर 19 अगस्त को विचार:

सुनवाई के दौरान पूर्व CJI के नेतृत्व में जांच की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र कमेटी या विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की गई। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट इस दिशा में काम कर रहा है। 19 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत एसआईटी गठन, पैलेट गन पर सरकार के जवाब और राज्यों द्वारा वापस ली गई एफआईआर के आंकड़ों की समीक्षा करेगी।

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