Friday , 17 July 2026

आजम खान को तगड़ा झटका: जौहर यूनिवर्सिटी की 38 अवैध इमारतों पर चलेगा बुलडोजर, RDA ने जारी किया ध्वस्तीकरण का आदेश

रामपुर। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने एक बेहद सख्त रुख अपनाते हुए मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय परिसर के भीतर बिना स्वीकृत नक्शे के बनाई गईं 38 इमारतों को पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया है। इसके साथ ही इन सभी अवैध भवनों को जमींदोज (ध्वस्त) करने का अंतिम आदेश भी जारी कर दिया गया है। आरडीए की यह बड़ी कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27(1) के तहत अमल में लाई गई है। प्रशासन ने यह फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल करने और विस्तृत सुनवाई के बाद लिया है।

जिला प्रशासन का कड़ा रुख, 15 जुलाई को हुई व्यक्तिगत सुनवाई

रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जिले के भीतर अवैध निर्माणों के खिलाफ लगातार एक सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में क्षेत्रीय अवर अभियंता (जूनियर इंजीनियर) की एक विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर में हुए निर्माण कार्यों की जांच शुरू की गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को बकायदा नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का पूरा समय दिया गया। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 8 जुलाई को इस नोटिस का अपना लिखित जवाब दाखिल किया था, जिसके बाद 15 जुलाई को मामले में व्यक्तिगत सुनवाई की गई। इस उच्चस्तरीय सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय प्रबंधन के प्रतिनिधि, रामपुर विकास प्राधिकरण के आला अधिकारी और दोनों पक्षों के अधिवक्ता मौजूद रहे।

यूनिवर्सिटी ने दी यह दलील: ‘पहले विकास क्षेत्र में शामिल नहीं था गांव’

RDA की इस कार्रवाई के खिलाफ सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी तरफ से बचाव में कई तर्क पेश किए। यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से दलील दी गई कि जिस सिंगनखेड़ा गांव में विश्वविद्यालय की इमारतें बनी हैं, वह क्षेत्र 27 सितंबर 2024 से पहले रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के विकास क्षेत्र की सीमा में शामिल ही नहीं था। इसलिए, उस समयावधि के दौरान आरडीए से किसी भी भवन निर्माण का नक्शा पास कराने की कोई कानूनी जरूरत नहीं थी। विश्वविद्यालय ने यह भी दावा किया कि परिसर के भीतर बने ज्यादातर निर्माण काफी पुराने हैं, जिसके कारण वर्तमान में लागू नियमों और पैमानों के आधार पर इन्हें अवैध घोषित नहीं किया जा सकता।

आरडीए ने खारिज किए सारे दावे, सिर्फ दो इमारतों की अनुमति आई सामने

रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय की इन सभी दलीलों और तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया है। आरडीए द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि भले ही सिंगनखेड़ा गांव बाद में विकास प्राधिकरण के दायरे में शामिल हुआ हो, लेकिन जिस समय ये निर्माण कार्य किए जा रहे थे, उस समय भी संबंधित सक्षम प्राधिकारी से भवन निर्माण की कानूनी अनुमति लेना बेहद अनिवार्य था।

जांच के दौरान जब जिला पंचायत रामपुर के पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए, तो उसमें केवल दो इमारतों—मेडिकल कॉलेज भवन और अकादमिक ब्लॉक (Academic Block) के नक्शे ही स्वीकृत पाए गए। इन दो के अलावा बाकी बची सभी 38 इमारतों के संबंध में किसी भी प्रकार की वैध निर्माण स्वीकृति या अनुमति का कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं मिला।

नियमों के उल्लंघन पर चला हंटर, कानूनी तर्कों की गलत व्याख्या पकड़ी गई

डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि जांच में यह बात पूरी तरह साबित हो गई है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन इस नियम से बहुत अच्छे से वाकिफ था कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सरकारी मंजूरी जरूरी होती है। इसी वजह से उन्होंने मेडिकल कॉलेज और अकादमिक ब्लॉक के लिए जिला पंचायत से विधिवत अनुमति ली थी। इसके बावजूद, बाकी 38 भवनों का निर्माण बिना किसी मंजूरी के मनमाने ढंग से करा दिया गया।

प्राधिकरण ने इसे नियमों का खुला उल्लंघन माना है। उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा-59 का हवाला देते हुए आदेश में कहा गया है कि ऐसे अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है, भले ही वह क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण की सीमा में आया हो। आरडीए ने विश्वविद्यालय द्वारा मास्टर प्लान और जोनल प्लान की दी गई दलीलों को भी कानून की गलत व्याख्या बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया।

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