नई दिल्ली/पुणे। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET UG) पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महाराष्ट्र के लातूर और पुणे के चर्चित रेणुकाई करियर सेंटर (आरसीसी) के संस्थापक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को 9 दिनों की CBI हिरासत में भेज दिया है। अदालत में सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने इस पूरे संगठित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और मुख्य साजिशकर्ताओं का पर्दाफाश करने के लिए 10 दिनों की रिमांड मांगी थी, जिसके बाद कोर्ट ने 9 दिनों की हिरासत मंजूर की।
छापेमारी में मोबाइल से मिला लीक प्रश्न पत्र, गिरफ्तारी से पहले 8 घंटे पूछताछ
CBI की टीम ने यह बड़ी कार्रवाई मोटेगांवकर को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार करने के बाद की है। गिरफ्तारी से ठीक पहले जांच एजेंसी ने मोटेगांवकर के आवास और ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस सर्च ऑपरेशन के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन से NEET UG परीक्षा का मूल लीक प्रश्न पत्र बरामद हुआ है।
जांच एजेंसी का सीधा आरोप है कि शिवराज मोटेगांवकर देश भर में प्रश्न पत्र लीक करने और उसे सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से प्रसारित करने वाले एक बेहद रसूखदार और संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है। पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही कस्टडी में लेकर उससे करीब 8 घंटे तक कड़ी पूछताछ की गई, जिसमें उसने कई राज उगले हैं।
#WATCH | Delhi: NEET UG Exam Paper leak case | Rouse Avenue court granted 9 days' custody to Shivraj Raghunath Motegaonkar to the CBI.
The CBI sought 10 days' custody of Motegaonkar. https://t.co/gLFMSBvpRx pic.twitter.com/uQLQBGq2YF
— ANI (@ANI) May 18, 2026
चौंकाने वाला खुलासा: परीक्षा से 10 दिन पहले 23 अप्रैल को ही बिक चुका था पेपर
CBI द्वारा अदालत में पेश किए गए रिमांड नोट और दस्तावेजों में एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। जांच में पता चला है कि मोटेगांवकर और इस गिरोह के अन्य मुख्य आरोपियों के पास परीक्षा शुरू होने से करीब 10 दिन पहले, यानी 23 अप्रैल को ही लीक प्रश्न पत्र और उसके सटीक उत्तर (Answer Key) पहुंच चुके थे।
आरोप है कि मोटेगांवकर ने मोटी रकम लेकर लीक हुए इन प्रश्न पत्रों और उत्तरों को चुनिंदा छात्रों तक पहुंचाया। सबूत मिटाने के लिए छात्रों को ये सवाल-जवाब बकायदा हस्तलिखित (Handwritten) नोट्स के रूप में दिए गए थे और उन्हें रटवाया गया था। शातिर दिमाग आरोपियों ने खेल यहीं खत्म नहीं किया, बल्कि परीक्षा समाप्त होते ही छात्रों से वे सभी हस्तलिखित नोट्स वापस लेकर तुरंत नष्ट कर दिए, ताकि जांच एजेंसियों के हाथ कोई लिखित सबूत न लग सके। अब CBI जब्त किए गए मोबाइल फोन को फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजेगी, ताकि डिलीट किए गए डेटा, व्हाट्सएप चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स को पूरी तरह रिकवर किया जा सके।
प्रोफेसरों का सिंडिकेट: नीट धांधली में अब तक 10 बड़े चेहरे गिरफ्तार
NEET पेपर लीक मामले की इस देशव्यापी जांच में CBI अब तक 10 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। शिवराज मोटेगांवकर की गिरफ्तारी से पहले इस नेटवर्क से जुड़े कई नामचीन चेहरों और शिक्षकों को दबोचा गया है। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने बाकायदा कोचिंग और कॉलेजों के प्रोफेसरों का एक सिंडिकेट बना रखा था।
पकड़े गए आरोपियों में केमिस्ट्री के मशहूर लेक्चरर पीवी कुलकर्णी और बायोलॉजी की लेक्चरर मनीषा मंधारे शामिल हैं। वहीं, मनीषा वाघमारे नाम की महिला लेक्चरर इन दोनों शिक्षकों और कोचिंग संचालकों के बीच मुख्य कड़ी (ब्रोकर) के रूप में काम कर रही थी, जो फिलहाल CBI की कड़ी हिरासत में है। इन शिक्षकों ने वाघमारे के जरिए मोटी रकम देने वाले छात्रों को परीक्षा से ऐन पहले गुप्त ठिकानों पर ‘विशेष सत्रों’ (Special Sessions) में बुलाया था, जहां मोबाइल और नोट्स के जरिए पूरा पेपर रटवाने का घिनौना जाल बुना गया था। CBI को उम्मीद है कि मोटेगांवकर से आमने-सामने पूछताछ में इस रैकेट के कुछ और बड़े सफेदपोश आकाओं के नाम सामने आएंगे।
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