भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है। इस हाई-प्रोफाइल केस की संजीदगी और निष्पक्ष जांच की मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी कमान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। गृह विभाग द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 6 के तहत सीबीआई को पूरे मध्य प्रदेश में इस मामले की कमान संभालने और जांच करने के अधिकार दे दिए गए हैं। ट्विशा के पिता और परिजनों ने पहले ही स्थानीय पुलिस पर मामले की लीपापोती करने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की गुहार लगाई थी, जिसे अब सरकार ने मंजूरी दे दी है।
कटारा हिल्स के घर में हुई थी मौत, दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज
यह पूरा मामला भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र का है, जहां बीते 12 मई 2026 को ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के बाद कटारा हिल्स पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85, 3(5) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। हालांकि, शुरुआत से ही मृतका के मायके पक्ष ने पुलिसिया कार्रवाई की सुस्त रफ्तार पर गहरी नाराजगी जाहिर की थी।
मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह अब भी फरार, पुलिस ने घोषित किया इनाम
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल ट्विशा के पति समर्थ सिंह को लेकर खड़ा हो रहा है। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी भोपाल पुलिस समर्थ को दबोचने में पूरी तरह नाकाम रही है। पुलिस ने आरोपी पति पर 30 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है। भोपाल पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, आरोपी के देश छोड़कर भागने की आशंका को देखते हुए उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस (Lookout Notice) जारी किया जा चुका है, साथ ही उसके बैंक खातों और पासपोर्ट की भी गहनता से जांच की जा रही है।
रिटायर्ड जज सास को मिली जमानत, साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका
ट्विशा के परिजनों ने उसकी सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की भूमिका पर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि गिरिबाला सिंह को अदालत से जमानत मिल चुकी है और वह उसी घर में रह रही हैं जहां ट्विशा की मौत हुई थी। आरोप है कि प्रभाव के चलते पुलिस ने उनसे अब तक कोई औपचारिक या सख्त पूछताछ नहीं की है, जिससे क्राइम सीन और महत्वपूर्ण साक्ष्यों से छेड़छाड़ होने का अंदेशा बढ़ गया है। हालांकि, स्थानीय पुलिस का दावा है कि उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया जा चुका है।
फॉरेंसिक जांच में देरी और शव को सुरक्षित रखने पर लापरवाही के आरोप
जांच प्रक्रिया के तरीकों को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। मृतका के भाई आशीष शर्मा ने आरोप लगाया कि जिस बेल्ट से कथित तौर पर फांसी लगाने का दावा किया जा रहा है, उसे पुलिस ने घटना के दो दिन बाद फॉरेंसिक लैब भेजा। यही नहीं, कोर्ट ने ट्विशा के शव को -80 डिग्री तापमान वाली विशेष फ्रीजर सुविधा में सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन पुलिस और प्रशासन अब तक यह व्यवस्था करने में भी नाकाम रहे। भाई का सीधा आरोप है कि आरोपी पक्ष के रसूखदार और प्रभावशाली होने के कारण जांच को भटकाने की कोशिश की जा रही थी, यही वजह है कि आरोपी समर्थ सिंह पुलिस के हत्थे चढ़ने के बजाय हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाने में कामयाब हो गया। अब परिजनों को उम्मीद है कि सीबीआई इस मामले की तह तक जाकर सच सामने लाएगी।
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