Friday , 15 May 2026

40 की उम्र पार करते ही हो जाएं सावधान! NHM की चेतावनी- जरा सी लापरवाही छीन सकती है आपकी आंखों की रोशनी

हेल्थ डेस्क: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी आंखें 40 की उम्र के बाद सबसे ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं? राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने आंखों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद जरूरी और गंभीर चेतावनी जारी की है। एनएचएम के अनुसार, 40 वर्ष की आयु पार करने के बाद हर व्यक्ति के लिए आंखों की नियमित जांच करवाना बेहद अनिवार्य है। आजकल स्वास्थ्य के प्रति हमारी लापरवाही अनजाने में ही हमारी अनमोल दृष्टि को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है, जिसे समय रहते रोकना बेहद जरूरी है।

धुंधला दिखने को न समझें ‘बढ़ती उम्र का असर’, हो सकती है गंभीर बीमारी

अक्सर देखा जाता है कि 40 साल की उम्र के बाद लोग नजर कमजोर होने या धुंधला दिखने जैसी समस्याओं को बुढ़ापे की शुरुआत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं या बिना डॉक्टर की सलाह के चश्मा खरीद लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। इस उम्र में समय पर की गई जांच आंखों की कई खतरनाक बीमारियों को उनके शुरुआती चरण में ही पकड़ने और रोकने में मदद कर सकती है। दृष्टि हमारी सबसे अनमोल धरोहर है, और इसकी सुरक्षा करना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

बिना लक्षण के अंधा बना सकती हैं ये दो साइलेंट किलर बीमारियां

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की रिपोर्ट के मुताबिक, चालीस की उम्र के बाद आंखों में कई स्वाभाविक और जैविक बदलाव आते हैं। इस उम्र में नजदीक की चीजें धुंधली दिखाई देने लगती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में जरादूरदृष्टि या ‘प्रेसबायोपिया’ (Presbyopia) कहा जाता है।

लेकिन सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह है कि इसी उम्र के दौरान ‘ग्लूकोमा’ (काला मोतिया) और ‘डायबिटिक रेटिनोपैथी’ (मधुमेह संबंधी रेटिना रोग) जैसी घातक बीमारियां बिना किसी बड़े बाहरी लक्षण या दर्द के, धीरे-धीरे आंखों के अंदर विकसित होने लगती हैं। चूंकि इनके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए इन्हें ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। अगर सही समय पर इनका पता न चले, तो यह हमेशा-हमेशा के लिए अंधापन (स्थायी दृष्टि हानि) का कारण बन सकती हैं।

साल में एक बार आई टेस्ट है जरूरी, इन मरीजों को है डबल खतरा

नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित नेत्र परीक्षण (Eye Test) ही दृष्टि सुरक्षा का सबसे आसान और अचूक तरीका है। अगर शुरुआती स्टेज में ही बीमारी पकड़ में आ जाए, तो इलाज बेहद आसान और प्रभावी हो जाता है।

  • सामान्य लोगों के लिए: 40 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार अपनी आंखों का कम्प्लीट चेकअप जरूर कराना चाहिए।

  • हाई रिस्क ग्रुप के लिए: जिन लोगों को डायबिटीज (मधुमेह), हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) की बीमारी है, या जिनके परिवार में पहले से ही आंखों की गंभीर बीमारियों का इतिहास (Family History) रहा है, उन्हें हर छह महीने में एक बार जांच करवाना अनिवार्य है।

एनएचएम का स्पष्ट मंत्र है: “समय पर पहचान, बेहतर बचाव”। नियमित आई टेस्ट न केवल आंखों की रोशनी बचाता है, बल्कि यह शरीर में छुपे हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के शुरुआती संकेतों को भी पकड़ सकता है, क्योंकि इन बीमारियों का सीधा और सबसे पहला असर आंखों की महीन नसों पर ही दिखाई देता है।

डिजिटल स्क्रीन से दूरी और ये 7 सुपरफूड्स बचाएंगे आंखों की रोशनी

डिजिटल युग में आंखों को सेहतमंद रखने के लिए विशेषज्ञों ने स्क्रीन टाइम (Screen Time) को कम करने की सख्त सलाह दी है। हमेशा अच्छी रोशनी में ही पढ़ाई-लिखाई करें और मोबाइल या कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग करने से बचें। इसके साथ ही, अपनी डाइट में नीचे दिए गए पौष्टिक खाद्य पदार्थों को जरूर शामिल करें, जो विटामिन ए, सी, ई, ल्यूटिन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं:

  • गाजर और पालक: यह विटामिन ए और ल्यूटिन का पावरहाउस हैं जो रेटिना को मजबूत करते हैं।

  • ब्रोकली और संतरा: इनमें मौजूद विटामिन सी आंखों की कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है।

  • कीवी और ब्लूबेरी: ये शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं जो बढ़ती उम्र के असर को कम करते हैं।

  • बादाम: विटामिन ई से भरपूर बादाम आंखों की नसों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।

इन छोटे-छोटे उपायों और खान-पान में बदलाव करके आप बढ़ती उम्र में भी अपनी आंखों की चमक और रोशनी को सालों-साल बरकरार रख सकते हैं।

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