Friday , 1 May 2026

IVF की आड़ में नाबालिग बच्चियों के अंडे बेचने वाला गिरोह सक्रिय, आधार कार्ड बदलकर की जा रही तस्करी….ऐसे चल रहा था घिनौना खेल

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर से एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। यहां ‘इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ (IVF) की आड़ में नाबालिग लड़कियों के भविष्य और उनके शरीर के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। गिरोह के सदस्य महज 13 से 15 साल की मासूम बच्चियों को अपना शिकार बना रहे हैं और उनके अंडों (Eggs) की खरीद-फरोख्त का काला कारोबार कर रहे हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

आधार कार्ड में हेराफेरी: 13 साल की बच्ची को बनाया 23 का

जांच में यह बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दलाल नाबालिग लड़कियों के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। बच्चियों के आधार कार्ड में उनकी जन्मतिथि बदलकर उम्र को 23 साल से अधिक दिखाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि भारत में अंडादान (Egg Donation) के लिए डोनर की न्यूनतम आयु 23 वर्ष होना अनिवार्य है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बच्चियों को चंद रुपयों का लालच देकर इस दलदल में धकेला जा रहा है।

‘प्रीमियम डोनर’ के नाम पर लाखों का सौदा

इस पूरे खेल में डॉक्टरों और महिला दलालों की मिलीभगत के सबूत भी मिले हैं। गिरोह के सदस्य निसंतान दंपतियों से ‘प्रीमियम डोनर’ और ‘हाई प्रोफाइल डोनर’ के नाम पर 2 लाख रुपये तक वसूलते हैं। जबकि, उन मासूम बच्चियों को मात्र 25 से 30 हजार रुपये देकर टरका दिया जाता है। पूरे आईवीएफ पैकेज के नाम पर ग्राहकों से 5 से 6 लाख रुपये तक ऐंठे जा रहे हैं। दलाल व्हाट्सऐप पर बच्चियों की तस्वीरें भेजकर उनकी बोली लगवाते हैं।

हार्मोनल इंजेक्शन का कहर और मासूमों की सेहत से खिलवाड़

अंडों की संख्या बढ़ाने के लिए इन छोटी बच्चियों को खतरनाक हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं। उन्हें कई दिनों तक गुप्त ठिकानों पर रखा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कम उम्र में शरीर के साथ ऐसी छेड़छाड़ जानलेवा हो सकती है। इन इंजेक्शनों के कारण अंडाशय में सूजन, हार्मोनल असंतुलन और भविष्य में हमेशा के लिए बांझपन का खतरा मंडरा रहा है।

कानून की उड़ रही धज्जियां

भारत में अंडाणु की खरीद-फरोख्त पूरी तरह गैरकानूनी है। नियमों के मुताबिक डोनर की पहचान गुप्त रखना और उसकी उम्र का सही होना अनिवार्य है। लेकिन उदयपुर के इस नेटवर्क ने न केवल नियमों को ताक पर रखा, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी तार-तार कर दिया है। एक ही लड़की से बार-बार अंडादान करवाया जा रहा है, जो उसके जीवन के लिए घातक साबित हो सकता है।

जांच के घेरे में कई अस्पताल और दलाल

फिलहाल यह मामला उजागर होने के बाद प्रशासन सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई अस्पतालों और क्लिनिकों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। उन महिला दलालों की पहचान की जा रही है जो झुग्गी-बस्तियों और गरीब इलाकों में सक्रिय हैं। सवाल यह उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस काले धंधे की भनक किसी को नहीं थी?

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