
लखनऊ: ‘मां’ पर अपनी भावुक कलम से दुनिया के दिलों पर राज करने वाले मशहूर शायर मुनव्वर राणा का परिवार एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह शायरी नहीं, बल्कि एक पारिवारिक भूचाल है. उनकी बेटी हिबा राणा, जो खुद भी सामाजिक और राजनीतिक बहसों में मुखर रही हैं, ने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस का दरवाजा खटखटाया है. विडंबना देखिए, हिबा उन्हीं शख्सियतों में से एक थीं, जिन्होंने तीन तलाक कानून का जमकर विरोध किया था.
दहेज, मारपीट और तीन तलाक का सनसनीखेज आरोप
हिबा राणा ने लखनऊ के सआदतगंज थाने में अपने पति सैय्यद मोहम्मद साकिब और ससुराल वालों के खिलाफ तहरीर दी है, जिसमें उन्होंने दहेज के लिए उत्पीड़न, मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और यहां तक कि तीन तलाक देने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं. शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक नया मोड़ आ गया है.
जब ये तीन तलाक.. पर कानून बन रहा था तब इसका विरोध करने वालों में सबसे प्रमुख शायर मुनव्वर राणा और उनकी बेटियां थी
मुनव्वर राणा ने खूब विरोध किया था उन्होंने कहा कि सरकार को हमारे मसले में हमारे मजहब के मसले में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है हम क्यों अपने मामले को पुलिस स्टेशन… pic.twitter.com/OM7MxIV5YT
— Ocean Jain (@ocjain4) February 3, 2026
2013 में हुई थी शादी, दो बच्चों की हैं मां
हिबा राणा का निकाह 19 दिसंबर 2013 को सैय्यद मोहम्मद साकिब के साथ हुआ था. उनके परिवार में दो बच्चे भी हैं. हिबा की शिकायत के अनुसार, शादी के समय दहेज में कीमती जेवरात और नकदी दी गई थी, लेकिन ससुराल पक्ष की मांगें यहीं नहीं रुकीं और उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जाने लगा. मामला इतना बढ़ा कि अब यह थाने तक पहुंच चुका है.
जब पिता-पुत्री ने किया था कानून का विरोध
यह मामला इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ रहा है क्योंकि जब अगस्त 2019 में तीन तलाक कानून लागू हो रहा था, तो शायर मुनव्वर राणा और उनकी बेटियों ने इसका पुरजोर विरोध किया था. मुनव्वर राणा ने यहां तक कहा था कि “सरकार को हमारे मजहब के मामले में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है, हम क्यों अपने मामले को पुलिस स्टेशन पर ले चलें?” आज उन्हीं की बेटी अपने पारिवारिक विवाद को लेकर पुलिस के पास इंसाफ की गुहार लगा रही है.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कुछ लोग इसे कानून की जीत बता रहे हैं, तो कई इसे निजी मामला कहकर सार्वजनिक बहस पर सवाल खड़े कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, “जब तक आग अपने घर तक ना आए, तब तक दूसरे का दर्द नहीं समझ आता.” वहीं कुछ लोग हिबा के साथ सहानुभूति जता रहे हैं और उनके लिए न्याय की मांग कर रहे हैं.
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