Tuesday , 3 November 2026

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में हर तरह के पटाखों की खुलेआम बिक्री पर जताई गहरी चिंता, सरकार को तत्काल ध्यान देने के निर्देश

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर समस्या के बीच खुलेआम हर तरह के पटाखों की धड़ल्ले से हो रही बिक्री पर देश की सर्वोच्च अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रमुख मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार को इस संवेदनशील मामले पर तुरंत संज्ञान लेने और प्रभावी कदम उठाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए याद दिलाया कि कोर्ट ने केवल अधिकृत लाइसेंस धारकों द्वारा क्यूआर कोड वाले प्रमाणित ‘ग्रीन क्रैकर्स’ (हरित पटाखों) की बिक्री को ही मंजूरी दी थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

आदेश के बावजूद बाजार में सब कुछ मिल रहा, मीडिया रिपोर्ट पर कोर्ट सख्त

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी से कहा कि एक हालिया मीडिया रिपोर्ट में छपी तस्वीर ने राजधानी की असल स्थिति उजागर कर दी है। कोर्ट ने कहा कि कल दिए गए स्पष्ट अदालती निर्देशों और पाबंदियों के बावजूद दुकानों पर अब हर प्रकार के पटाखे बेधड़क बेचे जा रहे हैं। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने सरकार के वकील से दो टूक कहा, “कृपया इस पर तुरंत ध्यान दें।”

अदालत ने रेखांकित किया कि रिपोर्ट के अनुसार बाजारों में लाइसेंस वाले, बिना लाइसेंस वाले, अधिकृत क्यूआर कोड वाले और बिना क्यूआर कोड वाले प्रतिबंधित पटाखे भी बिना किसी रोक-टोक के आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध हैं।

केवल क्यूआर कोड वाले ग्रीन क्रैकर्स को थी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पटाखों की पैकेजिंग पर क्यूआर कोड छापना इसलिए अनिवार्य किया गया था ताकि उपभोक्ता और प्रवर्तन एजेंसियां मौके पर ही स्कैन कर यह पुष्टि कर सकें कि पटाखा वास्तव में प्रमाणित पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन क्रैकर है या नहीं। इसके बावजूद बाजार में नियमों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित पटाखों का जमावड़ा दिखना प्रशासनिक निगरानी और पुलिस व्यवस्था पर सीधे तौर पर सवाल खड़े करता है। अदालत ने सरकारी पक्ष से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि आदेशों का कड़ाई से अनुपालन कराया जाए ताकि हवा की गुणवत्ता और खराब न हो।

 

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