Tuesday , 3 November 2026

UP Voter List Verification: पीलीभीत में गड़बड़ी के बाद चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, पूरे यूपी की वोटर लिस्ट की फिर होगी जांच; दो SDM निलंबित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और हेरफेर सामने आने के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सख्त रुख अख्तियार किया है। चुनाव आयोग ने अब पूरे प्रदेश की मतदाता सूची का नए सिरे से सत्यापन कराने का बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में वोटर लिस्ट का दोबारा गहन परीक्षण करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

इस राष्ट्रव्यापी स्तर के सत्यापन अभियान के तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत या स्थानांतरित लोगों के नाम काटने और पते या विवरण में संशोधन के लिए जमा किए गए फॉर्म-6, 7 और 8 की विशेष रूप से एक-एक कर पड़ताल की जाएगी। आयोग ने यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को दो टूक निर्देश दिया है कि मतदाता सूची में सामने आई किसी भी खामी को तुरंत दुरुस्त किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले अफसरों और कर्मचारियों पर सीधी कार्रवाई की जाए।

पीलीभीत में 10 हजार से अधिक प्रविष्टियों में गड़बड़ी, दो एसडीएम नपे

पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में लॉगिन आईडी और डेटा फीडिंग के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद आयोग ने त्वरित कार्रवाई की है। इस मामले में निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के तौर पर तैनात दो एसडीएम स्तर के अधिकारियों—मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोनों अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं हो जाती और आयोग की औपचारिक मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक उनकी बहाली नहीं होगी।

इसके साथ ही वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (VRC) के आउटसोर्स कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की भूमिका की भी जांच की जा रही है और संबंधित एजेंसी को उसकी सेवाएं तत्काल समाप्त करने के आदेश दिए गए हैं।

पीलीभीत की चारों विधानसभा सीटों की होगी अलग से स्क्रूटनी

चुनाव आयोग ने पीलीभीत जिले की सभी चारों विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की अलग-अलग स्क्रूटनी कराने के आदेश दिए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी को पूरी विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर मुख्य निर्वाचन अधिकारी की सिफारिशों व टिप्पणियों के साथ सात दिनों के भीतर आयोग को सौंपने को कहा गया है। इस जांच में मुख्य रूप से यह परखा जाएगा कि नाम जोड़ने (फॉर्म-6), नाम हटाने (फॉर्म-7) और विवरण संशोधन (फॉर्म-8) में तय चुनाव नियमों का अक्षरशः पालन हुआ है या नहीं। इसके अलावा आयोग ने जिले के पांच सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (AERO) और कंप्यूटर ऑपरेटर पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी तीन दिनों के भीतर तलब की है।

SIR के बाद यूपी में कटे 2.04 करोड़ वोट, 5 राज्यों में भारी गिरावट

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में चुनाव आयोग की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया गया था। इस प्रक्रिया के अंतिम आंकड़ों में मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई। पांचों राज्यों में कुल मतदाताओं की संख्या 18.71 करोड़ से घटकर 16.43 करोड़ रह गई, यानी करीब 2.29 करोड़ मतदाताओं के नाम कटे।

इन आंकड़ों में सबसे बड़ा झटका अकेले उत्तर प्रदेश में लगा, जहां शुद्ध रूप से 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम कम हुए हैं। अब पीलीभीत में डेटा में हेरफेर का मामला पकड़ में आने के बाद पूरे प्रदेश में दोबारा जांच के आदेश से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

 

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