
राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) की महारैली के चलते मध्य दिल्ली और आसपास के प्रमुख बाजारों में त्योहारी खरीदारी बुरी तरह प्रभावित हुई। दीपावली के व्यस्त कारोबारी सीजन के बीच कनाॅट प्लेस, पालिका बाजार, सुपर बाजार, जनपथ और चावड़ी बाजार जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर ग्राहकों की भारी कमी देखी गई, जिससे व्यापारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
कनॉट प्लेस में पसरा रहा सन्नाटा, गलियारों में बैठे रहे प्रदर्शनकारी
रैली स्थल के सबसे नजदीक स्थित कनॉट प्लेस (सीपी) और उसके आसपास के रेस्टोरेंट्स का कारोबार देर रात तक बमुश्किल 40 प्रतिशत तक ही पहुंच सका। आउटर सर्कल से मिंटो ब्रिज होते हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं के मार्च निकालने के चलते पूरे इलाके में अनिश्चितता और असमंजस का माहौल बना रहा। स्थिति यह रही कि अधिकांश दुकानें दिनभर बंद रहीं और दुकानों के आगे गलियारों में प्रदर्शनकारी दरी बिछाकर आराम करते व भोजन करते दिखे। शाम के समय भी सामान्य दिनों जैसी चहल-पहल नहीं लौटी और पार्किंग स्थल खाली नजर आए।
20 बाजारों पर असर, 11 हजार करोड़ के नुकसान का दावा
व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के अनुसार महारैली के कारण रामलीला मैदान के आसपास के करीब 20 प्रमुख बाजारों की लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की संभावित बिक्री प्रभावित हुई। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि सुरक्षा चिंताओं और तनावपूर्ण माहौल के चलते इन बाजारों की केवल 20 प्रतिशत दुकानें ही खुल सकीं। सामान्यतः त्योहारी सीजन में जहां इन बाजारों में लगभग पांच लाख खरीदार पहुंचते हैं, वहीं रविवार को बमुश्किल एक लाख लोग ही खरीदारी के लिए निकले। एनसीआर और पड़ोसी शहरों के खुदरा खरीदारों ने भी आने से परहेज किया।
नेताओं से की गई थी रैली टालने की अपील
व्यापारी संगठनों का कहना है कि रैली में 10 लाख लोगों के जुटने के दावों को देखते हुए उन्होंने पहले ही मुख्य विपक्षी नेताओं से संपर्क किया था। सीटीआई ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को पत्र भेजकर त्योहारी सीजन के मद्देनजर रैली को दीपावली के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया था।
एनडीटीए ने अदालत से लगाई गुहार, राजनीतिक बयानबाजी तेज
नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदर्शनों के कारण ग्राहकों में डर का माहौल रहता है, जिससे उनकी आजीविका सीधे प्रभावित होती है। संगठन ने अपील की कि कनॉट प्लेस को किसी भी प्रकार की रैली, मार्च या प्रदर्शन से मुक्त रखा जाए और ऐसी गतिविधियां केवल निर्धारित स्थलों तक सीमित रहें। दूसरी ओर, कनाॅट प्लेस में दुकानें बंद रहने को लेकर कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर दावा किया कि ये दुकानें भाजपा द्वारा जानबूझकर बंद करवाई गई थीं।
चांदनी चौक और सदर बाजार में दोपहर बाद सुधरी स्थिति
कनॉट प्लेस के उलट दोपहर बाद चांदनी चौक और सदर बाजार में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय भार्गव ने बताया कि अनुमान के मुकाबले भीड़ काफी नियंत्रित रही और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण दोपहर बाद खरीदारों का भरोसा लौटा। शाम होते-होते दिल्ली व एनसीआर के खरीदारों की आवाजाही बढ़ी, जिससे इन बाजारों के व्यापारियों को कुछ राहत मिली।
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