
चंडीगढ़ पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को लगातार बड़े सियासी झटके लग रहे हैं। अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। 24 घंटे के भीतर पार्टी के तीन विधायकों के इस्तीफे से राज्य की सियासत में भारी हलचल मच गई है। कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैसले का ऐलान करते हुए विधानसभा अध्यक्ष को अपना त्यागपत्र भेज दिया है। अपने संदेश में उन्होंने दावा किया कि विधायक के तौर पर उन्होंने अपने 90 प्रतिशत लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
‘माई-बाप संस्कृति’ खत्म करने को बताया सबसे बड़ी उपलब्धि कुंवर विजय प्रताप सिंह ने कहा कि उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि पंजाब की राजनीति से ‘माई-बाप संस्कृति’ को समाप्त करना रही है। उन्होंने जनता को ही अपनी प्रेरणा मानकर काम किया। पंजाब के वर्तमान हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य इस समय नशाखोरी, फिरौती, गैंगस्टरवाद और भ्रष्टाचार की गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। इसके समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है, ताकि पंजाब को फिर से उसकी गौरवशाली और प्रगतिशील पहचान दिलाई जा सके।
सदन में गली-मोहल्लों से लेकर बेअदबी कांड तक उठाए मुद्दे पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में अमृतसर नॉर्थ और पूरे पंजाब के ज्वलंत मुद्दों को बिना किसी झिझक के प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्वच्छ पेयजल आपूर्ति, सीवरेज व्यवस्था, सर्किट हाउस, कंपनी बाग, गंदे नालों की सफाई, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, सरकारी मेडिकल कॉलेज, सरूप रानी कॉलेज के विकास से लेकर बहुचर्चित बरगाड़ी बेअदबी कांड के न्याय का मुद्दा लगातार सदन में गूंजने दिया। उन्होंने दावा किया कि सदन में पहली बार गलियों और मोहल्लों का नाम लेकर बुनियादी समस्याओं को उठाया गया। आगे की रणनीति पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका एकमात्र ध्येय ‘पंजाब फर्स्ट’ है और वह स्वच्छ राजनीति व पारदर्शी प्रशासन के लिए काम करते रहेंगे।
24 घंटे में तीन विधायकों का इस्तीफा, भाजपा में जाने की अटकलें कुंवर विजय प्रताप सिंह से ठीक पहले समाना के विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इस तरह 24 घंटे के अंदर आप के तीन प्रमुख विधायक पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की तेज चर्चा है कि ये तीनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी द्वारा आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने और इन क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज नियुक्त करने के बाद से ही बगावत के सुर तेज हो गए थे।
आईपीएस से राजनेता तक का सफर और पार्टी से खटास कुंवर विजय प्रताप सिंह वर्ष 2015 के फरीदकोट बेअदबी और पुलिस फायरिंग मामले की जांच से विशेष रूप से जुड़े रहे थे। पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर वे आम आदमी पार्टी में शामिल हुए और 2022 के विधानसभा चुनाव में अमृतसर नॉर्थ से भारी मतों से जीत दर्ज की। हालांकि, सरकार बनने के कुछ समय बाद ही बेअदबी मामलों की जांच और सरकार की कार्यशैली को लेकर उनकी पार्टी नेतृत्व से अनबन शुरू हो गई। उन्होंने जनवरी 2023 में विधानसभा की आश्वासन कमेटी से इस्तीफा दे दिया था और वे लगातार मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे। पार्टी विरोधी रुख के चलते पार्टी ने उन्हें जून 2025 में 5 साल के लिए निलंबित कर दिया था, जिसके बाद अब उन्होंने विधानसभा की सदस्यता भी छोड़ दी है।
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